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      <title>Teaching based on inquiry by Vasumati Chaturvedi</title>
      <link>https://padlet.com/vasumati_chatur/zmwzoh5xb553</link>
      <description>आजादी के बाद भारत की युवा पीढ़ी के सामने क्या चुनौतियाँ रही होंगी? और वर्तमान में युवा पीढ़ी के सामने का चुनौतियाँ हैं?</description>
      <language>en-us</language>
      <pubDate>2018-09-27 06:15:53 UTC</pubDate>
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         <title>Aniruddh singh</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/vasumati_chatur/zmwzoh5xb553/wish/287449284</link>
         <description><![CDATA[<div>&nbsp;</div><div>जब भारत आजाद हुआ था तब हमारे पास बहुत सारी चुनौती थी. उसमे से एक चुनौती खाने की कमी थी.&nbsp;<br><br></div><div>जब अंग्रेज हमारा भारत छोड़ कर गए थे ताब हमारे पास कुछ नही बचा था, न ही पैसा था जूच बहार से खरीदने के लिए ना ही कुछ उगने के लिए अनाज थे. तो तब के ज़माने में जब अंग्रेज हमारे फसल को जला के अफीम उगते थे तब वह गजह ख़राब हो जाती थी और फिर हम वह कुछ नही उगा पते थे. तो जब हमें आजादी मिली तब हम बहुत गरीब हो गयी थी लेकिन फिर हम लोगो ने हार नही मानी और फिर हमने महनत करके हमने बहुत साड़ी फसल उगाई और फिर हमने यह चुनौती को कम कर दिया.लेकिन आज के ज़माने में यह चुनौती अभी भी है गरीबो को खाना नही मिलता है और उनके पास पैसो की कमी है. लेकिन जो लोगों ने मेहनत की और काम किया वो लोग आज अमीर है. आज के ज़माने में अब भारत के पास बहुत सारी चीजे है. अब भारत इतना अच्छा हो गया है की पूरी दुनिया से लोग हमारे भारत में आते है.&nbsp;<br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-01 06:36:40 UTC</pubDate>
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         <title>Aditya patwala </title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/vasumati_chatur/zmwzoh5xb553/wish/287449568</link>
         <description><![CDATA[<div>परिवर्तन चक्र तीव्र गति से घूम रहा है। सामाजिक स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसे में मनुष्य एक विचित्र से झंझावात में फंसा हुआ है। बाह्य रूप से चारों ओर भौतिक एवं आर्थिक प्रगति दिखाई देती है, सुख-सुविधा के अनेकानेक साधनों का अंबार लगता जा रहा है, दिन-प्रतिदिन नए-नए आविष्कार हो रहे हैं, पर आंतरिक दृष्टि से मनुष्य टूटता और बिखरता जा रहा है। उसका संसार के प्रति विश्वास, समाज के प्रति सद्भाव और जीवन के प्रति उल्लास धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। अब तो समाज में चारों ओर आपसी सौहार्द, समरसता एवं सात्विकता के स्थान पर कुटिलता, दुष्टता और स्वार्थपरता ही दृष्टिगोचर होती है। बुराई के साम्राज्य में अच्छाई के दर्शन अपवाद स्वरूप ही हो पाते हैं।</div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-01 06:38:02 UTC</pubDate>
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         <title>Sahil dhayal</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>भारत कि आजादि से बाद , युवा पिडी को पहले डर लगा होगा कि अब वह क्या करेगे, वह अपना घर कैसे बासाऐन्गे&nbsp; परन्तु आजादि के बाद , जैसे कि हर्कोइ जानता है कि भारत के अच्छे के लिए , सरकार ने विदेशी चोम्पनिएस् को भारत मे आके व्यापार करने को कहा , उस समय कि सारी यवा पीडी नोकरी मिली होगी क्युकी सरकार चाहती थी की जितना हो सके , उतना पैसा भारत की अर्थव्यवस्था मे हे रहे . विदेशी चोम्पनिएस् व भारती सन्स्थाओ ने भी भारत की युवाओ को रोजगार दिअा.&nbsp;</div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-01 06:38:18 UTC</pubDate>
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         <title>Ajay Wadhwani</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><strong>आज़ादी के पहले क्या चुनोतीयॉंथी और अब क्या है।<br></strong><br></div><div><br></div><ul><li>किसानों को ज़बरदस्ती फ़सले ऊगवाते थे और उनकी फ़सले को हार्प लेते थे।</li><li>उन किसानो से कर भी ज़्यादा लेते थेल</li><li>महात्मा गांधी जी ने भी बहूत संघर्ष किया था।</li><li>लोगों के पास नोकरी भी नहीं थी।</li><li>उनहोने अपनी ज़मीने भी हार्प लि थी।</li><li>महात्मा गांधी जी ने दानदी मार्च किया था।</li></ul><div><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-01 06:43:50 UTC</pubDate>
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         <title>Anish Artwani</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>1897 में विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन आज भी न सिर्फ जीवित है, बल्कि दुनिया के लाखों लोगो के लिए उम्मीद का केंद्र बना हुआ है. यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सामाजिक क्षेत्रों में अपने अथक सेवा कार्यो के लिए दुनियाभर में अपना खास और सम्मानित स्थान रखता है. देश की राजधानी दिल्ली में स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम में भी इस सेवा भावना के साकार रूप को देखा जा सकता है. दिल्ली आश्रम के सचिव स्वामी शांतात्मानंद पिछले चालीस साल से बतौर संन्यासी मठ में हैं और लगातार स्वामी विवेकानंद के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं.</div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-01 18:35:21 UTC</pubDate>
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         <title>Anuj Rathi</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/vasumati_chatur/zmwzoh5xb553/wish/288513491</link>
         <description><![CDATA[<div>आज़ादी के बाद भारत के नौजवानो ने बहुत संघर्ष किया है। भरत सन १९४७ में आज़ाद हुआ त। अंग्रेज़ो ने जो कर हिन्दुस्तनिओ पे लगाया था और जो ज़मीनो पे कब्ज़ा किया था वो हमारे देश के नौजवानों को वापस पाने के लिए बहुत संघर्ष किया त। उस समय भारत के नौजवानों के पास नाह ही नौकरी थी और नहीं ही इतना पैसा की खुद का धंधा खोल सक। वो वापस धन कमाने के लिये, युवा पीढ़ी बहुत समय तक बेरोज़गार रहे और जिसके कारण वो अपना और अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पा रहे द। उस समय शिक्षा का इतना महत्त्व नहीं था जितना की आज है, जिसकी वजह से युवा पीढ़ी अपनी शिक्षा पे धयान नहीं दे सक। लेकिन आज सन २०१८ में आज शिक्षा का महत्व है और विज्ञान ने इतनी उच्चाईया छुली है की आज अधिकतर नौजवानों के पास नौकरी है। लेकिन आज भी युवा पीढ़ी संघर्ष कर रही है क्यूंकि आज इतनी चुनोतिया है जैसे की अपने परिवार की जिमडेरिया उठान, परीक्षा में अव्वल आना और एक ाची नोकरी ढूँढ़ना इन् लोगो के सामने जिसकी वजह से तनाव पैदा होता है आज कल की युवा पीढी में।    <br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-03 09:25:02 UTC</pubDate>
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         <title>Anish Artwani</title>
         <author>anish_artwani</author>
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         <description><![CDATA[<pre>आज का समय में 
भारत को बड़े चुनोतीयॉंथी का सामना काना पड़ रहा है | जैसा किसानों को ज़बरदस्ती फ़सले ऊगवाते थे और उनकी फ़सले को हार्प लेते थे। बेरोजगारी 
और बहुत सारे </pre><div><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-04 06:38:46 UTC</pubDate>
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         <title>utsav saini</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2018-10-04 06:53:58 UTC</pubDate>
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         <title>utsav saini </title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>आज़ादी के बाद का समय भोहोत कठिन निकला है खास कर युवा पीढ़ी के लिए क्योकि उस समय और अभी भी नौकरी मिलना इतना आसान नै है और न हे रहा है युवा पीढ़ी के उप्पर पुरे परिवार के पालन पोषण के जिम्मेदारी होती है अभ भी यही हालत है आज भी युवाओ को नौकरी नहीं मिल रही जिसकी वजह से वो ज़ादा तर इस सोच मई हे रहते है की औगेर नौकरी नै मिले थो फील उनके परिवार का पालन पोषण कोण करे गए यही चीज़ उनको उस समय भी और अभी भी अंदर ही अंदर कहते रहती है </div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-04 07:09:55 UTC</pubDate>
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         <title>Anas </title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>आजादी के बाद भारत के युवाओ को भुत मुसीबतों का सामना करना पढ़ा था. भारत पकिस्तान के बटवारे के बाद युवा को रुजगार मिलना मुश्किल हो गया था . एकक बड़ी समस्या यो यहाँ थी की जभ बटवारा हुआ तभ युवाओ को यहाँ फैसला करना था की हिन्दुतान में रहे या पकिस्तान चले जाए. एकक समस्यां यहाँ थी की जभ अंग्रेजो ने भारत छोड़ा तभ युवाओ को कोई कला या काम नही सिखाया, ओन्होने सिर्फ गुलामी सिखाई. भारत के युवाओ को काम की खोज करना एकक भुत बड़ी समस्या थी. उस समय भारत में पढाई&nbsp;</div>]]></description>
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         <pubDate>2018-10-04 11:44:17 UTC</pubDate>
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