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      <title>Hindi Activity by Rivoli Sharma</title>
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      <description>वीर कुंवर सिंह &gt; कक्षा गतिविधि 7D</description>
      <language>en-us</language>
      <pubDate>2021-12-28 04:13:47 UTC</pubDate>
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         <title>Gouri Srivastava</title>
         <author>slpssilver149</author>
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         <description><![CDATA[<div><strong>मंगल पांडे, भारतीय सैनिक, जिसका 29 मार्च, 1857 को ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला, भारतीय के रूप में जाना जाने वाली पहली बड़ी घटना थी। उनका जन्म फैजाबाद के पास एक कस्बे में हुआ था जो अब उत्तरी भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्य है। हालाँकि, उनकी करियर की महत्वाकांक्षाएँ उनकी धार्मिक मान्यताओं के विरोध में आ गईं। दो ब्रिटिश सैनिकों पर उनके हमले के कारण, मंगल पांडे को 8 अप्रैल, 1857 को 29 वर्ष की आयु में फांसी पर लटका दिया गया था। इसका कारण आमतौर पर अंग्रेजों द्वारा एक नई प्रकार की एनफील्ड राइफल को पेश करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिसमें सैनिकों को बंदूक लोड करने के लिए कारतूस के सिरों को काटने की आवश्यकता होती है।</strong></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:16:37 UTC</pubDate>
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         <title>Shraddha Sharma</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><strong><em><sup>अरुणा आसफ अली भारत के स्वाधीनता संग्राम की ग्रांड ओल्ड लेडी और भारत छोड़ो आंदोलन के समय मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में भारतीय राष्ट्रीय कांग़्रेस का झंडा फहराने वाली अरुणा आसफ अली का जन्म 16 जुलाई, 1909 को तत्कालीन ब्रिटिश पंजाब के अधीन कालका के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था| अरुणा जी का जन्म बंगाली परिवार में 16 जुलाई सन 1909 ई. को हरियाणा, तत्कालीन पंजाब के 'कालका' नामक स्थान में हुआ था। इनका परिवार जाति से ब्राह्मण था। इनका नाम 'अरुणा गांगुली' था। कांग्रेस से सोशलिस्ट पार्टी में सन 1948 ई. में श्रीमती अरुणा आसफ़ अली 'सोशलिस्ट पार्टी' में सम्मिलित हुयीं और दो साल बाद सन् 1950 ई. में उन्होंने अलग से ‘लेफ्ट स्पेशलिस्ट पार्टी’ बनाई और वे सक्रिय होकर 'मज़दूर-आंदोलन' में जी जान से जुट गईं। अंत में सन 1955 ई. में इस पार्टी का 'भारतीय कम्यनिस्ट पार्टी' में विलय हो गया।</sup></em></strong><strong><em><br></em></strong><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:16:46 UTC</pubDate>
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         <title>रिया कौर बत्रा</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<blockquote><strong>भीकाजी कामा</strong></blockquote><div><em>श्रीमती भीकाजी जी रूस्तम कामा (मैडम कामा) भारतीय मूल की पारसी नागरिक थीं जिन्होने लन्दन, जर्मनी तथा अमेरिका का भ्रमण कर भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में माहौल बनाया. वो जर्मनी के स्टटगार्ट नगर में 22 अगस्त 1907 में हुई सातवीं अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज फहराने के लिए प्रसिध्द हैं. उस समय तिरंगा वैसा नहीं था जैसा आज है.<br>उनके द्वारा पेरिस से प्रकाशित 'वन्देमातरम्' पत्र प्रवासी भारतीयों में काफी लोकप्रिय हुआ. 1907 में जर्मनी के स्टटगार्ट में हुयी अन्तर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट कांग्रेस में मैडम भीकाजी कामा ने कहा, 'भारत में ब्रिटिश शासन जारी रहना मानवता के नाम पर कलंक है. एक महान देश भारत के हितों को इससे भारी क्षति पहुंच रही है.'<br>उन्होंने लोगों से भारत को दासता से मुक्ति दिलाने में सहयोग की अपील की और भारतवासियों का आह्वान किया, 'आगे बढ़ो, हम हिन्दुस्तानी हैं और हिन्दुस्तान हिन्दुस्तानियों का है.'<br>यही नहीं मैडम भीकाजी कामा ने इस कांफ्रेंस में 'वन्देमातरम्' अंकित भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज फहरा कर अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी. मैडम भीकाजी कामा लन्दन में दादा भाई नौरोजी की प्राइवेट सेक्रेटरी भी रही थी.</em></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:16:48 UTC</pubDate>
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         <title>Anvesha singh</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966166280</link>
         <description><![CDATA[<blockquote><strong>मंगल पांडे</strong></blockquote><div><mark>मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा में एक ब्रह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का नाम अभय रानी था। हालांकि कई इतिहासकार ने बताया है कि उनका जन्म फैजाबाद जिले की अकबरपुर तहसील के सुरहुरपुर गांव में हुआ था।</mark><em><mark>मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ बैरकपुर में जो बिगुल फूंका था। वह जंगल की आग की तरह फैलने लगी। विद्रोह की चिंगारी मेरठ की छावनी पहुंच गई थी। 10 मई 1857 को भारतीय सैनिकों ने मेरठ की छावनी में बगावत कर दी। कई छावनियों में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ गुस्सा तेज हो गया था। यह विद्रोह पूरे उत्तर भारत में फैल गया। इतिहासकारों का कहना है कि विद्रोह इतना तेजी से फैला था कि मंगल पांडे को फांसी 18 अप्रैल को देना था लेकिन 10 दिन पहले 8 अप्रैल को ही दे दी गई। ऐसा कहा जाता है कि बैरकपुर छावनी के सभी जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी देने से इनकार कर दिया था। फांसी देने के लिए बाहर जल्लाद बुलाए गए थे। 1857 की क्रांति भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था। जिसकी शुरुआत मंगल पांडे के विद्रोह से शुरू हुआ था। &nbsp;</mark></em></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:16:54 UTC</pubDate>
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      </item>
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         <title>Yashu Yadav [बाल गंगाधर तिलक]</title>
         <author>s20173</author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966166329</link>
         <description><![CDATA[<div><strong>बाल गंगाधर तिलक</strong> का जन्म <strong>23 जूलाई 1856</strong> को वर्तमान के महाराष्ट्र राज्य के <strong>रत्नागिरी</strong> जिले मे एक मराठी ब्राम्हण परिवार मे हुआ था। उनके जन्म का नाम <strong>केशव गंगाधर तिलक </strong>था। उनकी लोकप्रियता महात्मा गांधी के बाद दूसरे स्थान पर आती है। वे एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, विकल और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। ये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता बने। ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ, जिसका अर्थ हैं लोगों द्वारा स्वीकृत। <strong><em><br></em></strong><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:16:58 UTC</pubDate>
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      </item>
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         <title>अनुष्का दास [बिपिन चंद्र पाल ]</title>
         <author>s2028</author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966166444</link>
         <description><![CDATA[<div><mark>बिपिन चंद्र पाल जी का जन्मदिन 7 नवम्बर 1858। वह शिक्षक और पत्रकार के साथ-साथ,एक लेखक भी थे । विपिन चन्द्र कांग्रेस के क्रान्तिकारी देशभक्तों लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चन्द्र पाल (लाल बाल पाल) की तिकड़ी का हिस्सा थे। विदेशी उत्पादों के कारण देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल हो रही थी और यहाँ के लोगों का काम भी छिन रहा था। उन्होंने अपने आंदोलन में इस विचार को भी सामने रखा। उन्होंने एक विधवा से विवाह किया था जो उस समय दुर्लभ बात थी। इसके लिए उन्हें अपने परिवार से नाता तोड़ना पड़ा। किसी के विचारों से असहमत होने पर वह उसे व्यक्त करने में पीछे नहीं रहते। यहाँ तक कि सहमत नहीं होने पर उन्होंने महात्मा गाँधी के कुछ विचारों का भी विरोध किया था।<br></mark><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:17:06 UTC</pubDate>
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         <title>Manvi Singh</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966166547</link>
         <description><![CDATA[<div>झांसी की <strong>रानी</strong> लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1835 को काशी (वाराणसी) में महाराष्ट्रीयन कराड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम मोरोपन्त ताम्बे और माता का नाम भागीरथी <strong>बाई</strong> था। माता-पिता ने उनका नाम मणिकर्णिका रखा। सभी उन्हें प्यार से 'मनु'कहकर पुकारते थे।&nbsp;<strong>रानी लक्ष्मीबाई</strong> मराठा शासित झांसी की <strong>रानी</strong> और भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वनिता थीं। भारत को दासता से मुक्त करने के लिए सन् 1857 में बहुत बड़ा प्रयास हुआ। यह प्रयास इतिहास में भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम या सिपाही स्वतंत्रता संग्राम कहलाता है।अंग्रेज़ आठ दिनों तक क़िले पर गोले बरसाते रहे परन्तु क़िला न जीत सके। <strong>रानी</strong> एवं उनकी प्रजा <strong>ने</strong> प्रतिज्ञा कर ली <strong>थी</strong> कि अन्तिम सांस तक क़िले की रक्षा करेंगे।</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:17:16 UTC</pubDate>
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      </item>
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         <title>PAVNI CHUGH</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966167020</link>
         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:17:59 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>रिवोली शर्मा</title>
         <author>itz_RivoliS</author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966167465</link>
         <description><![CDATA[<pre><strong>मंगल पांडे</strong><br>मंगल पाण्डेय एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने १८५७ में भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वो ईस्ट इंडिया कंपनी की ३४वीं बंगाल इंफेन्ट्री के सिपाही थे। तत्कालीन अंग्रेजी शासन ने उन्हें बागी करार दिया जबकि आम हिंदुस्तानी उन्हें आजादी की लड़ाई के नायक के रूप में सम्मान देता है।&nbsp;</pre>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:18:34 UTC</pubDate>
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         <title>प्रश्न</title>
         <author>ntomar</author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966168033</link>
         <description><![CDATA[<div>किसी भी एक स्वतंत्रता&nbsp; सेनानी के विषय में जानकारी एकत्र कर (सचित्र) कम&nbsp; से कम 100 शब्दों में बताएं&nbsp; जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया हो |&nbsp;</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:19:20 UTC</pubDate>
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         <title>Shreyansh Srivastava</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966170144</link>
         <description><![CDATA[<pre><strong>रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 राणसी शहर में एक मराठी करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  उनका नाम मणिकर्णिका तांबे रखा गया और उनका उपनाम मनु रखा गया।  उनके पिता मोरोपंत तांबे  और उनकी मां भागीरथी सप्रे (भागीरथी बाई) थीं। उसके माता-पिता महाराष्ट्र से आए थे। जब वह चार साल की थीं, तब उनकी मां का देहांत हो गया था। उनके पिता कल्याणप्रांत के युद्ध के सेनापति थे। उनके पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजी राव द्वितीय के लिए काम करते थे। पेशवा ने उसे "छबीली" कहा, जिसका अर्थ है "चंचल"। वह घर पर शिक्षित थी और उसे पढ़ना और लिखना सिखाया गया था, और बचपन में अपनी उम्र के अन्य लोगों की तुलना में अधिक स्वतंत्र थी; उनकी पढ़ाई में शूटिंग, घुड़सवारी, तलवारबाजी  और मल्लखंबा अपने बचपन के दोस्तों नाना साहिब और तांतिया टोपे के साथ शामिल थे।  [संदिग्ध - चर्चा] रानी लक्ष्मीबाई ने भारत में महिलाओं के लिए कई पितृसत्तात्मक सांस्कृतिक अपेक्षाओं के विपरीत किया। इस समय समाज।</strong></pre><div><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:22:17 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966172567</link>
         <description><![CDATA[<div>Vrinda Sharma</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:25:59 UTC</pubDate>
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         <title>Prakrit Gupta </title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966173031</link>
         <description><![CDATA[<div>मंगल पांडे एक भारतीय सैनिक थे जिनका जन्म 19 जुलाई, 1827, अकबरपुर में हुआ था - उनकी मृत्यु 8 अप्रैल, 1857 को हुई थी, वे एक भारतीय सैनिक थे, जिनका 29 मार्च, 1857 को ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला, उनकी धार्मिक मान्यताओं के साथ संघर्ष में आया था। जब वह 1850 के दशक के मध्य में बैरकपुर में गैरीसन में तैनात थे, भारत में एक नई एनफील्ड राइफल पेश की गई थी, जिसमें हथियार लोड करने के लिए एक सैनिक को ग्रीस किए गए कारतूस के सिरों को काटने की आवश्यकता होती थी। एक अफवाह फैल गई कि स्नेहक का इस्तेमाल किया गया था चाहे गाय हो या सुअर, पांडे ने अपने साथी सिपाहियों को उनके ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ उठने के लिए उकसाने का प्रयास किया, उन अधिकारियों में से दो पर हमला किया, संयमित होने के बाद खुद को गोली मारने का प्रयास किया, और अंततः जबर्दस्ती और गिरफ्तार कर लिया गया। पांडे पर जल्द ही मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:26:40 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>Bhavya Sharma</title>
         <author>s13371</author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966174127</link>
         <description><![CDATA[<div>प्रथम स्वाधीनता संग्राम की नायिका झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, जिसने अंतिम सांस तक अंग्रेजों के विरुद्ध अपनी जंग जारी रखी, का जन्म 19 नवंबर, 1935 को वाराणसी में हुआ था. </div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:28:15 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>Pavni Chugh</title>
         <author>s2026</author>
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         <description><![CDATA[<div><strong>जन्म:</strong> 28 सितंबर 1907<br><strong>जन्म स्थान: </strong>लायलपुर ज़िले के बंगा, पंजाब&nbsp; <br><strong>निधन:</strong> 23 मार्च 1931<br><strong>मृत्यु का स्थान:</strong> लाहौर जेल में फांसी<br><br></div><ul><li><strong>शहीद भगत सिंह पंजाब के रहने वाले थे. उनके पिता का नाम 'किशन सिंह' और माता का नाम 'विद्यावती' था. क्या आप जानते हैं कि वे भारत के सबसे छोटे स्वतंत्रता सेनानी थे. वह सिर्फ 23 वर्ष के थे जब उन्होंने अपने देश के लिए फासी को गले लगाया था. भगत सिंह पर अराजकतावादी और मार्क्सवादी विचारधाराओं का काफी प्रभाव पड़ा था. लाला लाजपत राय की मौत ने उनको अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उत्तेजित किया था. उन्होंने इसका बदला ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या करके लिया. भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ केंद्रीय विधान सभा या असेंबली में बम फेंकते हुए क्रांतिकारी नारे लगाए थे. उनपर 'लाहौर षड़यंत्र' का मुकदमा चला और 23 मार्च, 1931 की रात भगत सिंह को फाँसी पर लटका दिया गया.</strong></li></ul>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:34:06 UTC</pubDate>
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      <item>
         <title>Kovid Garg</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<pre><strong>रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी शहर में एक</strong> <strong>मराठी करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका नाम मणिकर्णिका तांबे रखा गया और उनका उपनाम मनु रखा गया। उनके पिता मोरोपंत तांबे और उनकी मां भागीरथी सप्रे (भागीरथी बाई) थीं। उसके माता-पिता महाराष्ट्र से आए थे। जब वह चार साल की थीं, तब उनकी मां का देहांत हो गया था। उनके पिता कल्याणप्रांत के युद्ध के सेनापति थे। उनके पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजीराव द्वितीय के लिए काम करते थे। पेशवा ने उसे "छबीली" कहा, जिसका अर्थ है "चंचल"। वह घर पर शिक्षित थी और उसे पढ़ना और लिखना सिखाया गया था, और बचपन में अपनी उम्र के अन्य लोगों की तुलना में अधिक स्वतंत्र थी; उनकी पढ़ाई में उनके बचपन के दोस्त नाना साहिब और तांतिया टोपे के साथ शूटिंग, घुड़सवारी, तलवारबाजी और मल्लखंबा शामिल थे। रानी लक्ष्मीबाई ने इस समय भारत के समाज में महिलाओं के लिए कई पितृसत्तात्मक सांस्कृतिक अपेक्षाओं की तुलना की। रानी लक्ष्मीबाई महल और मंदिर के बीच अनुरक्षण के साथ घुड़सवारी करने की आदी थीं, हालाँकि कभी-कभी उन्हें पालकी में ले जाया जाता था। उनके घोड़ों में सारंगी, पवन और बादल शामिल थे; इतिहासकारों के अनुसार 1858 में किले से भागते समय वह बादल की सवारी करती थीं। उनका महल, रानी महल, अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है। इसमें 9वीं और 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच की अवधि के पुरातात्विक अवशेषों का संग्रह है।</strong></pre><div><br><br></div><div><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:38:25 UTC</pubDate>
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         <title>खुशी जैन</title>
         <author>s189</author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1966184056</link>
         <description><![CDATA[<div><strong>भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी की&nbsp; भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। क्योंकि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए आंदोलन की अगुवाई की थी। महात्मा गांधी की शांतिपूर्ण और अहिंसक नीतियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संघर्ष का आधार बनाया। उन्होंने सत्य और अहिंसा के पथ पर चलकर बापू ने देश को आजादी दिलाई और अंग्रेजों को भारत से बाहर करने के लिए समूचे देश को एक किया। 250 वर्षों से ब्रिटिश शासन के अधीन भारत के लिए गोपाल कृष्ण गोखले के अनुरोध पर 1915 में गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। भारतीय राजनीतिक मंच पर 1919 से 1948 तक महात्मा गांधी जी इस प्रकार छाए रहे कि इस युग को भारतीय इतिहास का गांधी युग कहा जाता है।&nbsp; </strong><br>&nbsp;</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-28 04:41:44 UTC</pubDate>
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         <title>Tavisha Sharma (लक्ष्मी सहगल)</title>
         <author>s143191</author>
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         <description><![CDATA[<div><strong>लक्ष्मी सहगल</strong> भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी, भारतीय राष्ट्रीय सेना की एक अधिकारी और आजाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री थीं। 24 अक्टूबर 1914 और 23 जुलाई 2012 को मृत्यु हो गई। लक्ष्मी को आमतौर पर भारत में कैप्टन लक्ष्मी के रूप में संदर्भित किया जाता है, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा में बंदी बनाए जाने पर उनके पद का संदर्भ। उनके द्वारा लिखित पुस्तक- ए रिवोल्यूशनरी लाइफ: मेमॉयर्स ऑफ ए पॉलिटिकल एक्टिविस्ट।&nbsp;<br>उनके पति का नाम प्रेम सहगल था। और उनकी बेटी थी सुभाषिनी अली सहगल। कैप्टन लक्ष्मी में उन सभी में खुशी और संभावना की भावना जगाने का गुण था जो उनसे मिले थे - उनके सहकर्मी, उनके संगठन के कार्यकर्ता, उनके मरीज, परिवार और दोस्त।</div><div><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-29 07:58:45 UTC</pubDate>
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         <title>Utkarsh Gautam</title>
         <author>s1413</author>
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         <description><![CDATA[<div>रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी शहर में एक मराठी करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका नाम मणिकर्णिका तांबे रखा गया और उनका उपनाम मनु रखा गया। उनके पिता मोरोपंत तांबे और उनकी मां भागीरथी सप्रे (भागीरथी बाई) थीं। उसके माता-पिता महाराष्ट्र से आए थे। जब वह चार साल की थीं, तब उनकी मां का देहांत हो गया था। उनके पिता कल्याणप्रांत के युद्ध के सेनापति थे। उनके पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजीराव द्वितीय के लिए काम करते थे। पेशवा ने उसे "छबीली" कहा, जिसका अर्थ है "चंचल"। वह घर पर शिक्षित थी, पढ़ने और लिखने में सक्षम थी, और बचपन में अपनी उम्र के अन्य लोगों की तुलना में अधिक स्वतंत्र थी; उनकी पढ़ाई में उनके बचपन के दोस्त नाना साहिब और तात्या टोपे के साथ शूटिंग, घुड़सवारी, तलवारबाजी और मल्लखंभा शामिल थे। रानी लक्ष्मीबाई ने इस समय भारत के समाज में महिलाओं के लिए कई पितृसत्तात्मक सांस्कृतिक अपेक्षाओं की तुलना की।</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-29 11:15:56 UTC</pubDate>
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         <title>Vrinda Sharma    लाला लाजपत राय</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>28 जनवरी, 1865 को लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के मोगा ज़िले में हुआ था. उनके पिता लाला राधाकृष्ण अग्रवाल पेशे से अध्यापक और उर्दू के प्रसिद्ध लेखक थे. प्रारंभ से ही लाजपत राय लेखन और भाषण में बहुत रुचि लेते थे. उन्होंने हिसार और लाहौर में वकालत शुरू की. लाला लाजपतराय को शेर-ए-पंजाब का सम्मानित संबोधन देकर लोग उन्हे गरम दल का नेता मानते थे. लाला लाजपतराय स्वावलंबन से स्वराज्य लाना चाहते थे.<br><br></div><div>1897 और 1899 में उन्होंने देश में आए अकाल में पीड़ितों की तन, मन और धन से सेवा की. देश में आए भूकंप, अकाल के समय ब्रिटिश शासन ने कुछ नहीं किया. लाला जी ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अनेक स्थानों पर अकाल में शिविर लगाकर लोगों की सेवा की.<br><br></div><div>इसके बाद जब 1905 में बंगाल का विभाजन किया गया था तो लाला लाजपत राय ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी और विपिनचंद्र पाल जैसे आंदोलनकारियों से हाथ मिला लिया और अंग्रेजों के इस फैसले की जमकर बगावत की. देशभर में उन्होंने स्वदेशी आंदोलन को चलाने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.<br><br></div><div>इसके बाद आया वह समय जब लाला जी की लोकप्रियता से अंग्रेज भी डरने लगे. सन् 1914-20 तक लाला लालजपत राय को भारत आने की इजाजत नहीं दी गई. प्रथम विश्वयुद्ध में भारत से सैनिकों की भर्ती के वे विरोधी थे. अंग्रेजों के जीतने पर उन्होंने यह अपेक्षा नहीं की कि वे गांधी जी की भारत स्वतंत्र करने की मांग स्वीकार कर लेंगे. अंग्रेज सरकार जानती थी कि लाल बाल (बाल गंगाधर तिलक) और पाल (विपिन चन्द्र पाल) इतने प्रभावशाली व्यक्ति हैं कि जनता उनका अनुसरण करती है. अंग्रेजों ने अपने को सुरक्षित रखने के लिए जब लाला को भारत नहीं आने दिया तो वे अमेरिका चले गए. वहां ‘यंग इंडिया’ पत्रिका का उन्होंने संपादन-प्रकाशन किया.न्यूयार्क में इंडियन इनफार्मेशन ब्यूरो की स्थापना की. इसके अतिरिक्त दूसरी संस्था इंडिया होमरूल भी स्थापित की.<br><br></div><div>साल 1920 में जब वह भारत आए तब तक उनकी लोकप्रियता आसमान पर जा चुकी थी. इसी साल कलकत्ता में कांग्रेस के एक विशेष सत्र में वह गांधी जी के संपर्क में आए और असहयोग आंदोलन का हिस्सा बन गए. लाला लाजपतराय के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन पंजाब में जंगल में आग की तरह फैल गया और जल्द ही वे पंजाब का शेर और पंजाब केसरी जैसे नामों से पुकारे जाने लगे. लालाजी ने अपना सर्वोच्च बलिदान साइमन कमीशन के समय दिया.<br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-12-29 11:29:11 UTC</pubDate>
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         <title>Utsav Jain</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/1979816622</link>
         <description><![CDATA[<div>Mangal Pandey was an Indian soldier who played a key part in the events immediately preceding the outbreak of the Indian rebellion of 1857. He was a sepoy in the 34th Bengal Native Infantry regiment of the British East India Company. In 1984, the Indian government issued a postage stamp to remember him</div>]]></description>
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         <pubDate>2022-01-07 01:58:35 UTC</pubDate>
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         <title>उन्नति गौड़</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/itz_RivoliS/mlscmxi77a4cjhaz/wish/2040050135</link>
         <description><![CDATA[<div><strong>भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर, 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका पैतृक गांव खट्कड़ कलां है जो पंजाब, भारत में है। उनके जन्म के समय उनके पिता किशन सिंह, चाचा अजित और स्वरण सिंह जेल में थे।भगत सिंह का परिवार एक आर्य-समाजी सिख परिवार था।भगत सिंह</strong>,<strong> राजगुरु और सुखदेव ने 1928 में लाहौर में एक ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद सेंट्रल एसेंबली में बम फेंक दिया। बम फेंकने के बाद वे भागे नहीं, जिसके नतीजतन उन्हें फांसी की सजा हुई थी। तीनों को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल के भीतर ही फांसी दे दी गई थी।</strong></div>]]></description>
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         <pubDate>2022-02-10 11:51:10 UTC</pubDate>
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