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      <title>आपका बंटी  - चर्चा व व्याख्या  by Anuradha Ruhil</title>
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      <description>Literary discussion on the novel आपका बंटी - 
Characterization </description>
      <language>en-us</language>
      <pubDate>2020-04-16 08:54:04 UTC</pubDate>
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         <title>बंटी - चरित्र चित्रण </title>
         <author>aru4</author>
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         <description><![CDATA[<div>- बंटी  सात साल का एक लड़का है जिसके माता पिता का तलाक हो चूका है, , वः अपनी माता के साथ रहता है  (SAINA )<br><br>- बंटी का जीवन आम बच्चो की तरह नहीं है , एक परिवार का सदस्य न होने से वोह हमेशा अकेला सा रहता है जब मम्मी स्कूल चली जाती है - (SAINA)<br><br>- चौकस- काफी छोटे उम्र से बंटी को अपने माँ के दोनों रूप नज़र आते हैं (MEERA)<br><br>- बंटी दिल का बहुत ही प्यारा बचा है ,जब उससे पता लगता है उसके माँ बाप का तलाक हो गया है और अब वोह बात नहीं करते तब वोह उनकी दोस्ती कराने की कोशिश करता है  - (SAINA )<br><br>- बंटी अपने माँ से बहुत प्यार करता है और उनका आदर भी करता है, बचपन से उसकी माँ ही उसका साहरा थी और अब उनके बिना उसकी ज़िन्दगी अधूरी है . जब उसक पिता उससे कोलकाता आने को कहते है तब उसकी एक ही शर्त होती है की मम्मी भी आएँगी  - ( SAINA)<br><br>-संवेदनशील और परिपक्व- बंटी हमेशा सोचता हैं कि वह कैसे अपने माँ को खुश रखे और उन्हें दर्द ना पहुंचाए... बंटी एक दस वर्ष के बच्चे कि तरह नहीं परन्तु एक बढ़े इंसान कि तरह सोचता हैं (MEERA)<br><br>-  बंटी एक बहुत ही जिज्ञासु बच्चा है, मम्मी की शिष्यों से लेकर तलाक के मतलब तक उसको सब चीज़ जननी है और उनका हल भी निकलना है | एक सात साल के बचे की दृष्टि से उसमे बहुत परिपक्वता भी है  ( SAINA ) <br><br>- बंटी उसका निक नेम है। उसका असली नाम अरुप बत्रा है  (v)<br><br>- बंटी अपनी माँ से बहुत प्यार करता था पर उसके बावजूद भी उनसे बहुत डरता था | उसको यह लगातार डर लगा रहता था की मम्मी उससे गुस्सा या नाराज़ तोह नहीं है| यह हमें तब पता चलता है जब बंटी कहता है " मम्मी की आँखों में प्यार देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुयी''  ( SAINA)<br><br>मनोवैज्ञानिक शैली के दवरा पाठकों को बंटी के विचारों को जानना मिलता है। जब वह डॉ जोशी के गाड़ी में पीछे बैठा था, थो वह यह जख के आश्चर्यचकित रह गया की डॉ जोशी ने शकुन तो आगे बैठने के लिए क्यों पूछा। जब उसने यह देखा की डॉ जोशी और उसके माँ के कंधे एक दुसरे को छू रहे थे, तो वह नाराज़ हो गया। यह इस बन का प्रतिक है कि बंटी के परिपक्व व्यवहार के मुखौटे के नीचे, वह सिर्फ एक बच्चा था, जो अपने और मम्मी के बीच एक तीसरे व्यक्ति कि स्थिति सहन नहीं कर सकता था। (MEERA)<br><br>- शुरू से ही बंटी अपनी माँ की ज़िन्दगी में इकलौता मर्द था उसने न कभी अपने पिता को घर पे रहता देखा न किसी और को | बंटी के लिए घर का मतलब सिर्फ माँ वोह और फूफी थे और अब जब डॉक्टर जोशी घर आने लगे और उनकी शादी हुयी तोह बंटी को यह सच का सामना करने में वक़्त लगा ( SAINA)<br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-04-16 09:02:49 UTC</pubDate>
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         <title>शकुन - चरित्र चित्रण</title>
         <author>aru4</author>
         <link>https://padlet.com/aru4/m3h50udhf798xtl1/wish/510216049</link>
         <description><![CDATA[<div>-"जब एक बार बुनती न कह दिया दलीय नहीं पसंद तोह क्यों बनाया, क्या तुम उसका इतना भीं ध्यान नहीं रख सकती" शकुन ने यह जब फूफी को बोलै इससे पता लगता है की उसके बंटी को कितना बिगाड़ा हुआ था और उसकी कैसे सारी बातें मानती थी क्यूंकि वः एक अकेला बचा था और शकुन का भी कोई और नहीं था - शकुन एक तलाकशुदा माँ थी और उसका एक बंटी नामित बेटा था<br><br>-  मेहनती:  शकुन एक काम काज़ी नारी थी जो बिना पति के साहित्य के साथ अपने बेटे को पालती थी. कॉलेज में प्रिंसिपल होने के अतिरिक्त, घर गृहस्थी और बच्चे की ज़िम्मेदारी भी उस पर ही पढ़ती थी (MEERA)<br><br>- अकेली: अपने पति के साथ वियोग के पश्चात, शकुन को हर पल अकेलापन महसूस होता है... उसे अपना काम करना पसंद है परन्तु शकुन के लिए कॉलेज एक वक्त गुजरने का बहाना भी है. अध्याय ३: "सामने खड़ी लम्बी छुट्टियां और गर्मी के बेहद लम्बे अलस और उदास दिन"  (MEERA)<br><br>- आधुनिक: शकुन एक, काम काज़ी नारी, जिसने अपने बेटे को अकेला बड़ा कियाँ है, जिसकी तलाक हो गयी है और जिसने तलाक के पश्चात एक और विवाह किया है,  अपने समय और समाज के लिए एक बहित प्रगतिशील औरत थी. (MEERA)<br><br>-  शकुन एक बहुत अच्छी माँ और एक मेहनती औरत थी | वः अपना काम और परिवार दोनों को एक संतुलन में रखती थी और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी | पति न होने के कारन वः घर के लिए कमाती भी थी और घर भी संभालती थी  <br>( SAINA ) <br><br>-  "वोह लगाने के बाद ऐसा लगता था मम्मी बदल गयी है" यह संवाद हमे यह बताता है की शकुन अपनी घर की ज़िन्दगी और स्कूल की ज़िम्मेदारी अलग रखती थी | समाज में एक औरत जिसका तलाक हुआ हो उसको कोई सम्मान नहीं देता परन्तु शकुन ने अपने लिए सम्मान कमाया था <br>( SAINA )<br><br>- "जब भी चाचा जी आते उसके बाद माँ कहीं दिन तक दुखी रहती" शकुन को पता था की चाचा जी उसके पति की तरफ से थे परन्तु शकुन उनका बहुत आदर करती थी और उनकी सारी बातें सुनती थी, उसने कभी भी उनको पराया नहीं समझा जिससे पता लगता है की शकुन एक बहुत ही आदर्श वादी इंसान है    ( SAINA )<br><br>- "जब एक बार बंटी न कह दिया दलीय नहीं पसंद तोह क्यों बनाया, क्या तुम उसका इतना भीं ध्यान नहीं रख सकती" शकुन ने यह जब फूफी को बोलै इससे पता लगता है की उसके बंटी को कितना बिगाड़ा हुआ था और उसकी कैसे सारी बातें मानती थी क्यूंकि वः एक अकेला बचा था और शकुन का भी कोई और नहीं था  ( SAINA)<br><br></div><div><br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-04-16 09:04:02 UTC</pubDate>
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         <title>शकुन- चरित्र चित्रण ( Diya )</title>
         <author>shukl89958_2</author>
         <link>https://padlet.com/aru4/m3h50udhf798xtl1/wish/513994392</link>
         <description><![CDATA[<div>-  शकुन बहुत ही बलवान औरत थी उससे समें में जप औरतें काम नहीं करती थी वो काम करती थी अपने बच्चे बँटी के लिए वह सारा काम ख़ुद करती थी ताकि वो अपने बच्चे का कहयाल रख सकेl वह बँटी और घर का ख़याल रखने के साथ साथ स्कूल प्रिन्सिपल की नौकरी बहुत ख़ूब निभाती थी  <br>-  शकुन भावनात्मक रूप से स्थिर थी क्यूँकि अकेले बच्चे का क़याल रखना बिना पिता की मदत से किसी को bही अकेला होने की मोनोभावना होती है पर उसके बावाजूत भी शकुन ने हिमट नहीं हारीl <br><br>बँटी - चरित्र चित्रण ( Diya )<br>- बँटी अकेला पद जाता है पारी वार का सदस्य नहीं माना जाता क्यूँकि उसके माँ और पिता का तलक हो जाता हैl बँटी की माँ  स्कूल में होती है और वह काफ़ी अकेला पद जाता हैl <br><br>- बँटी अपनी माँ के बहुत करीब है क्यूँकि वह बँटी का सभ कुछ है और वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता हैl<br>DIYA<br>-मन्नू भंडारी हिंदुस्तानी लेखिका है जो आपका बंटी और महाभोज के लिए जानी जाती हैl उनकी कहानी हमेशा लेंगिक सम्भंड के बारे में होती हैl <br>उनकी कहानी में महिला का बहुत महत्व होताha<br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-04-18 05:55:14 UTC</pubDate>
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         <title>सामाजिक samasya (v)</title>
         <author>dhoot83408</author>
         <link>https://padlet.com/aru4/m3h50udhf798xtl1/wish/521879726</link>
         <description><![CDATA[<div>आधुनिक समाज में प्रचलित विवाह की धारणा और अवधारणा पर सवाल उठता है। लेखिका का कलात्मक झुकाव उसे बुनाई की घटनाओं की एक श्रृंखला बनाता है जो तलाक और पुनर्विवाह की जटिलताओं को व्यक्त करता है। (vanshika)<br><br>बच्चों की उम्र के आधार पर तलाक के प्रभाव अलग-अलग होते हैं; उदाहरण के लिए, कुछ को गुस्सा आता है, कुछ को दुख होता है और कुछ को अस्वीकृति की भावना का अनुभव हो सकता है।(vanshika)<br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-04-22 03:46:38 UTC</pubDate>
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         <title>कहानी के बारे में </title>
         <author>tiwar971151</author>
         <link>https://padlet.com/aru4/m3h50udhf798xtl1/wish/521890715</link>
         <description><![CDATA[<div>- यह कहानी उस ज़माने के परिप्रेक्ष्य से बहुत ज़्यादा आधुनिक है , तलाक जैसे मुददे उस ज़माने में बहुत स्वीकार्य नहीं थे, परन्तु लेखिका का इस  मुददे पर लिखना और इसको समाज में स्वीकार्य बनाना एक बहुत बड़ी बात है ( SAINA) <br><br>- १९७० में औरतों का काम सिर्फ घर की देखभाल करना समझा जाता था परन्तु शकुन इस कहानी की नायक है जो घर भी संभालती है बंटी को भी और काम भी करती है , यह एक आधुनिक सोच का उद्धरण है जो लेखिका हमे दिखती है | शकुन उस समय की साड़ी औरतों के लिए एक मिसाल थी की वोह भी अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल करे    ( SAINA )<br><br>मनु भंडारी ने अपने आस-पास की मौजूदा दुनिया को इतनी शानदार तरीके से स्केच किया कि यह थीम पाठकों पर प्रभाव डालती है। यह उपन्यास हमें यह सोचने के लिए मजबूर करता है कि इससे पहले कि माता-पिता अधीर हो जाएं और यह सोचकर निर्णय लें कि केवल एक ही तरीका तलाक है, उन्हें अपने बच्चों की भावनाओं और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दो बार विचार करना चाहिए। शायद तब, वे बेहतर तरीके से निर्णय ले पाएंगे और खुशी से रह पाएंगे <br>(Vanshika)<br><br>- यह कहानी मनु भंडारी ने एक स्त्री के दृष्टिकोण से लिखी है, ज़्यादा तर हिंदी उपन्यास में कहानिया पुरुष के दृष्टिकोण से होती है परन्तु एक महिला की कहानी और उसकी मनोदशा समझाना एक बढ़ती हुयी सोच की निशानी है ( SAINA)<br><br><strong>उद्धरण</strong> <br>- जब मम्मी बंटी को कहती है की उससे डॉक्टर जोशी के यहाँ अच्छा लगेगा तोह वोह कुछ नहीं बोलता उससे बस अपने पापा का चेहरा बार बार दिखाई देता है इससे हमें पता चलता है की बंटी चाहे अपने पिता साथ न रहे वह उसने बहुत प्यार करता था और अपनी माँ की इस निर्णय से वह खुश नहीं था ( SAINA ) ch 10<br>-  <br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-04-22 03:56:50 UTC</pubDate>
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         <title>उद्धरण - Meera</title>
         <author>goel570781</author>
         <link>https://padlet.com/aru4/m3h50udhf798xtl1/wish/553693458</link>
         <description><![CDATA[<div>- बंटी: "कभी- कभी देखता यही तो अच्छी लगाती हैं, पर फिर जाने क्या हो जाता जय कि एकदम बुरी लगाने लगाती हैं। बुरी तो आजकल हो ही गई हैं ममी ।" (अध्याय 8 )<br><br>- "वह जो स्वेटर बन रही हैं वह वह भी उसके लिए नहीं बन रहीं। डॉक्टर जोशी के लिए बन रही हैं । जब तक डॉक्टर जोशी इस घर में नहीं आए थे ममी का हर काम, इस घर का हर काम बंटी के लिए ही होता था । अब सब कुछ डॉक्टर जोशी के लिए होने लगा है ।" (अध्याय 8)<br><br>- "ममी झपटकर आई, "क्या कर रहा है बंटी? खेलने दे न ! तेरा छोटा भाई ही तो है ।" "नहीं, मैं नहीं खेलने देता।कोई नहीं है मेरा छोटा- वोट भाई ।" (अध्याय 8 )<br><br><mark>- "जिस घर के लोग लीक छोड़कर चलेंगे, उसमें यही सब होगा। अभी क्या हुआ है, अभी तो बहुत कुछ होगा।" (अध्याय 8)<br></mark><br>- <mark>"अब तो हर बात के लिए वह डॉक्टर पर इस कदर निर्भर करने लगी है कि लगता है, एक कदम भी डॉक्टर के बिना चल नहीं सकेगी। औरत कहीं की कहीं पहुंच जाए, फिर भी पुरुष का साथ उसके मिए कितना ज़रुरुई है...पर वह साथ हो , सही अर्थो में।" (अध्याय 9)</mark><br><br>- "देखो शकुन, बंटी थोड़ा प्रॉब्लम बच्चा है , तो उसकी प्रॉब्लम को तो झेलना ही होगा।" शकुन को लगा, जैसे डॉक्टर कह रहे हों - इन्फ्लुएंजा है तो बदन में तो दर्द होगा ही। इन बातों पर कहीं इस तरगा बात कि जाती है ? और क्या प्रॉब्लम बच्चा है? पागल है, उसका दिमाग ख़राब है या कि ...पर नहीं, डॉक्टर से वह अपेक्षा ही क्यों करती है कि उसी की तरह सदय होकर , उसकी तरह माँ बनकर बंटी के बारे में सोचे! डॉक्टर तो शायद बाप बनकर भी नहीं सोच सकते ।" (अध्याय 9)<br><br><mark>जाने क्यों यह बात कहीं बहुत गहरे मन में बैठ गई है के ममी की परेशांनी के बीच कहीं वही होता है। (अध्याय 14)<br></mark><br><mark>" ठीक है बेटे, तू वहीँ चला जा । तेरे पापा तुझे लेने आ रहे हैं । अब मैं भू नहीं रोकूंगी । जब तू ही खुश नहीं तो ... आखिर अपने पापा से काम जिददी नो तू भी नहीं ।" (अध्याय 14)</mark></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-05-06 03:40:13 UTC</pubDate>
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         <title>उद्धरण (v)</title>
         <author>dhoot83408</author>
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         <description><![CDATA[<div>"मम्मी के एकमात्र सहारा बेटा बना की जिम्मेदारी"<br>chp 6 - कौन तय करता है कि एक छोटे बच्चे की जिम्मेदारियां क्या हैं?<br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-05-06 04:27:26 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author>goel570781</author>
         <link>https://padlet.com/aru4/m3h50udhf798xtl1/wish/1294574247</link>
         <description><![CDATA[-"जब एक बार बुनती न कह दिया दलीय नहीं पसंद तोह क्यों बनाया, क्या तुम उसका इतना भीं ध्यान नहीं रख सकती" शकुन ने यह जब फूफी को बोलै इससे पता लगता है की उसके बंटी को कितना बिगाड़ा हुआ था और उसकी कैसे सारी बातें मानती थी क्यूंकि वः एक अकेला बचा था और शकुन का भी कोई और नहीं था - शकुन एक तलाकशुदा माँ थी और उसका एक बंटी नामित बेटा था
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         <pubDate>2021-03-10 18:40:05 UTC</pubDate>
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