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      <title>My swanky padlet by Madeeha Gazi</title>
      <link>https://padlet.com/madeehagazi11/k7pb2uz9l7hggksp</link>
      <description>Made with charisma</description>
      <language>en-us</language>
      <pubDate>2021-08-23 12:47:18 UTC</pubDate>
      <lastBuildDate>2023-05-10 23:47:21 UTC</lastBuildDate>
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         <title>शब्दालंकार</title>
         <author>madeehagazi11</author>
         <link>https://padlet.com/madeehagazi11/k7pb2uz9l7hggksp/wish/1691392063</link>
         <description><![CDATA[<div>अलंकार के चार भेद हैं उन मे से एक शब्दालंकार हे।शब्दालंकार काव्य में शब्दगत चमत्कार को शब्दालंकार कहते हैं। शब्दालंकार मुख्य रुप से सात हैं, जो निम्न प्रकार हैं-अनुप्रास, यमक, श्लेष, वक्रोक्ति, पुनरुक्तिप्रकाश, पुनरुक्तिवदाभास और वीप्सा आदि। शब्दालंकार के तीन भेद होते है। वह है:<br>•अनुप्रास अलंकार<br>•यमक अलंकार<br>•श्लेष अलंकार |&nbsp;</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-08-23 15:46:22 UTC</pubDate>
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         <title>यमक अलंकार</title>
         <author>madeehagazi11</author>
         <link>https://padlet.com/madeehagazi11/k7pb2uz9l7hggksp/wish/1693231157</link>
         <description><![CDATA[<div>यमक अलंकार में किसी काव्य का सौन्दर्य बढ़ाने के लिए एक शब्द की बार-बार आवृति होती है। प्रयोग किए गए शब्द का अर्थ हर बार अलग होता है। शब्द की दो बार आवृति होना वाक्य का यमक अलंकार के अंतर्गत आने के लिए आवश्यक है।<br>यमक अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण :<br>केकी रव की नुपुर ध्वनि सुन, जगती जगती की मूक प्यास। बरजीते सर मैन के, ऐसे देखे मैं न हरिनी के नैनान ते हरिनी के ये नैन। तोपर वारौं उर बसी, सुन राधिके सुजान। तू मोहन के उर बसी ह्वे उरबसी सामान।&nbsp;</div>]]></description>
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         <pubDate>2021-08-24 08:05:58 UTC</pubDate>
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         <title>अनुप्रास अलंकार</title>
         <author>madeehagazi11</author>
         <link>https://padlet.com/madeehagazi11/k7pb2uz9l7hggksp/wish/1693234127</link>
         <description><![CDATA[<div>अनुप्रास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है-&nbsp; अनु + प्रास। यहा पर अनु का अर्थ है बार-&nbsp; बार और प्रास का अर्थ है वर्ण। जब किसी काव्य को सुंदर बनाने के लिए किसी वर्ण की बार-बार आवृति हो तो वह अनुप्रास अलंकार कहलाता है। किसी विशेष वर्ण की आवृति से वाक्य सुनने में सुंदर लगता है।<br>इस&nbsp;अलंकार&nbsp;में किसी वर्ण या व्यंजन की एक बार या अनेक वणों या व्यंजनों की अनेक धार आवृत्ति होती है।<br>Eg-&nbsp;<br>•रघुपति राघव राजा राम<br>•कालिंदी कूल कदंब की डारन<br>•प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं&nbsp;<br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-08-24 08:08:14 UTC</pubDate>
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         <title>श्लेष अलंकार </title>
         <author>madeehagazi11</author>
         <link>https://padlet.com/madeehagazi11/k7pb2uz9l7hggksp/wish/1693240375</link>
         <description><![CDATA[<div>श्लेष का अर्थ होता है चिपका हुआ या मिला हुआ।&nbsp; जब एक ही शब्द से हमें विभिन्न अर्थ मिलते हों तो उस समय श्लेष अलंकार होता है। यानी जब किसी शब्द का प्रयोग एक बार ही किया जाता है लेकिन उससे अर्थ कई निकलते हैं तो वह श्लेष अलंकार कहलाता है।&nbsp; कुछ उदाहरण श्लेष अलंकार के है&nbsp; :&nbsp;<br>(a) पी तुम्हारी मुख बास तरंग<br>आज बौरे भौरे सहकार।बौर-भौंर के प्रसंग में मस्त होनाआम के प्रसंग में–मंजरी निकलना<br>(b) जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।<br>बारे उजियारे करै, बढ़े अँधेरो होय।।<br>‘बारे’ का अर्थ-जलाना और बचपन<br>‘बढ़े’ का अर्थ-बुझने पर और बड़े होने परl<br>(c) जो घनीभूत पीड़ा थी मस्तक में स्मृति-सी छाई।<br>दुर्दिन में आँसू बनकर आज बरसने आई।।<br>‘घनीभूत’ के अर्थ–इकट्ठी और मेघ बनी हुईदुर्दिन के अर्थ-बुरे दिन और मेघाच्छन्न दिन।<br>(d) रावन सिर सरोज बनचारी चलि रघुवीर सिलीमुख धारी।<br>सिलीमुख’ के अर्थ-बाण, भ्रमर&nbsp;<br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2021-08-24 08:13:06 UTC</pubDate>
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