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      <title>कक्षा - 4 E  ई पत्रिका निर्माण  by ARCHANA CHAKU</title>
      <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la</link>
      <description>1.लेखक की कलम से 
2.कहानी 
3.कविता 
4.पहेली 
5.चुटकुले 
6.अंतर ढूँढो </description>
      <language>en-us</language>
      <pubDate>2020-08-12 18:36:58 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-13 07:20:40 UTC</pubDate>
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         <title>maa</title>
         <author>krishna260411</author>
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         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2020-08-13 13:51:02 UTC</pubDate>
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         <title>Gurvansh khullar</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/679701991</link>
         <description><![CDATA[<div>पुस्तकों की दुनिया<br><br>पुस्तकों की दुनिया निराली हैं । जो एक बार पुस्तकों की निराली दुनिया में डूब गया वो शायद ही उससे निकलना चाहे। अच्छी पुस्तकों के द्वारा हमारे अंदर छुपे रचनात्मक पहलु को नयी दिशा मिलती हैं। हालाँकि, आजकल डिजिटल युग में, लोग <a href="https://shabd.in/Hash/Tag/pustak">पुस्तक</a> पढ़ने की अपेक्षा अपना ज्यादा समय ऑनलाइन गेम्स और इंटरनेट की आभासी दुनिया में व्यतीत करना पसंद करते हैं। ये अत्यंत चिंता का विषय हैं क्योंकि अच्छी पुस्तकों में छिपे हुए ज्ञान को जो व्यक्ति आत्मसात कर लेता हैं वो जीवन में पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखता है।<strong>अच्छी पुस्तकें</strong> जीवन्त देव-प्रतिमाएँ हैं। उनकी आराधना से तत्काल प्रकाश और उल्लास मिलता है। -यहीं बात आ जाती हैं, अच्छी पुस्तकों के चुनाव की, हम क्या पढ़ रहे हैं, ये बहुत अहम विषय हैं। अच्छी पुस्तकें, हमारे अंदर विवेक जागृत कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। वही, भड़काऊ पुस्तकें युवा पाठकों को भटका कर दिग्भर्मित कर सकती हैं। राजनीति, विज्ञान, पर्यावरण चाहे कोई भी विषय हो, आपको हर विषय से सम्बंधित पुस्तकें मिल जाएंगी। रूचि के अनुसार, अध्ययन करने पर आप किसी भी विषय में महारथ हासिल कर सकतें हैं। जीवन में पुस्तकों के महत्व को कभी भी नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि नजाने कब कौन सी पुस्तक में छिपा विचार आपकी ज़िन्दगी बदल दें!</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 00:52:02 UTC</pubDate>
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         <title>VIRAJ UPPAL</title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/679950963</link>
         <description><![CDATA[<h1><strong><mark>अनोखी दोस्ती</mark></strong></h1><div><br><strong><mark>लेखक की कलम से</mark></strong> <br><br></div><div>“कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति। बिपति-कसौटी जे कसे, सोई सांचे मीत।” सुविख्यात कवि रहिमदास द्वारा रचित इस दोहे के माध्यम से कवि हम से कहता है, जब व्यक्ति के पास संपत्ति होता है तब उसके अनेक सगे-संबंधी तथा मित्र बनते हैं, उसके समीप आते हैं, पर विपत्ती के समय में जो आपका साथ दे, वहीं सच्चा मित्र है।<br><br>व्यक्ति को प्रत्येक रिश्ता अपने जन्म से ही प्राप्त होता है, अन्य शब्दों में कहें तो ईश्वर पहले से बना के देता है, पर दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है जिसका चुनाव व्यक्ति स्वयं करता है। सच्ची मित्रता रंग-रूप नहीं देखता, जात-पात नहीं देखता, ऊँच-नीच, अमीरी-गरीबी तथा इसी प्रकार के किसी भी भेद-भाव का खंडन करती है। आमतौर पर यह समझा जाता है, मित्रता हम-उम्र के मध्य होती है पर यह गलत है मित्रता किसी भी उर्म में और किसी के साथ भी हो सकती है।<br><br><strong><mark>कहानी  - 'सच्चे मित्र'<br><br></mark></strong>एक गाँव में रमन और राघव नाम के दो दोस्त रहा करते थे. रमन धनी परिवार का था और राघव गरीब. हैसियत में अंतर होने के बावजूद दोनों पक्के दोस्त थे. <br><br></div><div>समय बीता और दोनों बड़े हो गए. रमन ने अपना पारिवारिक व्यवसाय संभाल लिया और राघव ने एक छोटी सी नौकरी तलाश ली. जिम्मेदारियों का बोझ सिर पर आने के बाद दोनों के लिए एक-दूसरे के साथ पहले जैसा समय गुज़ार पाना संभव नहीं था. जब मौका मिलता, तो ज़रूर उनकी मुलाकातें होती.<br><br></div><div>एक दिन रमन को पता चला कि राघव बीमार है. वह उसे देखने उसके घर चला आया. हाल-चाल पूछने के बाद रमन वहाँ अधिक देर रुका नहीं. उसने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और उसे राघव के हाथ में थमाकर वापस चला गया.<br><br></div><div>राघव को रमन के इस व्यवहार पर बहुत दुःख हुआ. लेकिन वह कुछ बोला नहीं. ठीक होने के बाद उसने कड़ी मेहनत की और पैसों का प्रबंध कर रमन के पैसे लौटा दिए.<br><br></div><div>कुछ ही दिन बीते ही थे कि रमन बीमार पड़ गया है. जब राघव को रमन के बारे में मालूम चला, तो वह अपना काम छोड़ भागा-भागा रमन  के पास गया और तब तक उसके साथ रहा, जब तक वह ठीक नहीं हो गया.<br><br></div><div>राघव का यह व्यवहार रमन को उसकी गलती का अहसास करा गया. वह ग्लानि से भर उठा. एक दिन वह राघव के घर गया और उससे अपने किये की माफ़ी मांगते हुए बोला, “दोस्त! जब तुम बीमार पड़े थे, तो मैं तुम्हें पैसे देकर चला आया था. लेकिन जब मैं बीमार पड़ा, तो तुम मेरे साथ रहे. मेरा हर तरह से ख्याल रखा. मुझे अपने किये पर बहुत शर्मिंदगी है. मुझे माफ़ कर दो.”<br><br></div><div>राघव ने रमन को गले से लगा लिया और बोला, “कोई बात नहीं दोस्त. मैं ख़ुश हूँ कि तुम्हें ये अहसास हो गया कि दोस्ती में पैसा मायने नहीं रखता, बल्कि एक-दूसरे के प्रति प्रेम और एक-दूसरे की परवाह मायने रखती है.”<br><br></div><div><strong>सीख – पैसों से तोलकर दोस्ती को शर्मिंदा न करें. दोस्ती का आधार प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की परवाह है.<br></strong><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 06:01:12 UTC</pubDate>
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      </item>
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         <title>           भारतीय त्योहार                      </title>
         <author>dhingrapriyanka218</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/679988326</link>
         <description><![CDATA[<div><strong>लेखक की कलम से </strong><br>(<strong>Aradhya Dhingra)</strong> </div><div><mark>त्योहारों का हमारे जीवन में बहुत खास महत्व है। ये हमारे जीवन में उमंग और उत्साह का संचार करते हैं। साथ ही ये हमारे जीवन में प्रसन्नता और परिवर्तन का अवसर लाते हैं। इसीलिए इनका हमारे जीवन में विशेष महत्व माना जाता है।</mark></div><div><mark>हमारे भारत देश को अगर पर्व और त्यौहारों का देश कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि जितने त्यौहार हमारे देश में मनाये जाते हैं, उतने शायद ही किसी और देश में मनाये जाते होंगे। भारत अनेकता में एकता का देश है। इसकी झलक त्यौहारों के मौकों पर भी देखने को मिलती है। हमारे देश में ऐसे कई पर्व और त्योहार हैं, जिन्हें लोग बड़े ही उत्साहपूर्वक मनाते हैं।</mark></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 06:57:09 UTC</pubDate>
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         <title>VYOM JINDAL</title>
         <author>vyomjindal</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/680025860</link>
         <description><![CDATA[<div><strong><mark>अनोखी दोस्ती</mark></strong></div><div><br></div><pre><strong>1. लेखक की कलम से</strong></pre><div><br>" मथत मथत माखन रहै दही मही बिलगाय<br>रहिमन सोई मीत है भीर परे ठहराय "<br><br>दही को बार बार मथने से दही और मक्खन अलग हो जाते हैं।<br>रहीम कहते हैं कि सच्चा मित्र दुख आने पर तुरंत सहायता के लिये पहुॅच जाते हैं।<br>मित्रता की पहचान दुख में हीं होता है।<br><br></div><pre><strong>2. कहानी </strong></pre><div><br><strong>सबसे सच्चा रिश्ता “दोस्ती”<br></strong><br>एक युद्ध में, एक फौजी अपने जख्मी दोस्त को अपने क्षेत्र में लाने की कोशिश कर रहा था।<br><br>उसके कप्तान ने कहा, “वो अभी किसी काम का नहीं! तुम्हारे दोस्त को मरना होगा।”<br><br>लेकिन फौजी फिर भी जाता है और अपने दोस्त को वापिस लेके आता है।<br><br>दोस्त का मृत शरीर देखकर, कप्तान कहता है, “मैंने तुमसे कहा था की अब यह किसी काम का नहीं, वह मर चूका है।”<br><br>तभी वह फौजी नम आखो से जवाब देता है, “नहीं सर, यह मेरे लिए बहोत कीमती है……”<br><br>जब मैंने उसे ढूंडा तब मेरे दोस्त ने मुझे देखा, मुस्कुराया और उसने अपने अंतिम शब्द कहे:<br><br>“मै जानता था की तुम जरुर आओगे”………….<br><br>ऐसी कीमती, सच्ची और मजबूत दोस्ती आज हमें बहोत कम देखने मिलती है….जीवन में सच्चे दोस्त, जब आपको उसकी जरुरत होती है तब हमेशा आपके साथ रहते है।<br><br>दोस्ती की कई महान कहानिया हमें इतिहास में दिखाई देती है। कई लोगो ने दोस्ती में अपनी जान तक गवई है। कहा जाता है माता-पिता के बाद अगर कोई किसी को पास से जान सकता है तो वो “दोस्त” ही है।<br><br>जीवन में कई बार हम ऐसी मुश्किलों में फसे होते है, जिस समय हम किसी से सहायता नहीं ले सकते, उस समय दोस्त हमारी सहायता करता है। दोस्त वही होता है जो हमारे दिल की बातो को जान लेता है। निश्चित ही अगर हमारा दोस्त हमारे साथ हो तो हम बड़े से बड़ी चुनौती को भी आसानी से पार कर सकते है।<br><br></div><pre><strong>3. कविता</strong></pre><div><br><strong>खुश्बू जैसे दोस्त</strong><br><br>सुख दुख के साथी रहें ,बचपन के वो यार।<br>छिपा छिपाई खेलना ,वो गेंदों की मार।<br><br>नहीं धर्म अरु जात का ,दिखा कभी संयोग।<br>मित्र सदा मन में बसें ,मन से मन का योग।<br><br>मित्र कभी लेता नहीं ,बस देने की बात।<br>जिसमें स्वारथ है बसा ,मित्र नहीं वह घात।<br><br>खुश्बू जैसे दोस्त हैं ,महकें चारों ओर।<br>रिश्तों की इस रात में ,मित्र ऊगती भोर।<br><br>शब्दों में गाली भरी ,मन में बसता प्यार।<br>मित्र जहाँ भी मिल गए ,मन होता गुलजार।<br><br>मित्र स्वर्ग की देन हैं ,मित्र धरा के रंग।<br>मित्र सदा मन में बसें ,बन जीवन के ढंग।<br><br>कृष्ण सुदामा मित्रता ,देती है सन्देश।<br>ऊँच नीच से दूर हैं ,मित्रों के परिवेश।<br><br></div><pre><strong>4. पहेली</strong></pre><div><br>धन-दौलत से बड़ी है यह, <br>सब चीजों से ऊपर है यह । <br><br>जो पाए पंडित बन जाए, <br>बिन पाए मूर्ख रह जाए ॥<br><br></div><pre><strong>5. चुटकुले</strong></pre><div><br>                          A. <br>एक तोता एक कार से टकरा गया, <br>तो उस कार वाले ने उसे उठा कर पिन्जरा मे डाल दिया <br>दूसरे दिन जब तोते को होश आया, वह बोला,आईला! जेल, कार वाला मर गया क़्या.<br><br>                           B.  <br>विज्ञापनो की मम्मी कितनी अच्छी होती है.<br>बच्चे कपड़े गंदे करके आए तो भी हँस के धोती है.<br>बचपन में जब हम कपडे गंदे कर के आते थे,तो पहले हम धुलते थे, बाद में कपड़े!!<br><br></div><pre><strong>6. अंतर ढूँढो</strong></pre><div><br>सात अंतर ढूंढो |</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 08:01:02 UTC</pubDate>
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         <title>कार्टून की दुनिया</title>
         <author>krishna260411</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/680066681</link>
         <description><![CDATA[<div><strong><em><mark>KRISHNA KUMAR SINGH<br></mark></em></strong><strong><mark>लेखक की कलाम से <br></mark></strong><strong><em><mark><br></mark></em></strong><mark>कार्टून……रेखाओं का ऐसा संयोजन है, जो देखने वाले के मन को गुदगुदा देता है, साथ ही समाज की विसंगतियों पर कटाक्ष भी करता है । अखबारों ओर पत्रिका का विशेष आकर्षण उनमें छपे कार्टून होते हैं । हमारे जीवन में इनका विशिष्ट महत्व इसलिए है कि ये हमारे जिंदगी से कहीं न कहीं जुड़े होते हैं ।<br></mark><br></div><div><mark>कार्टून हमारे जीवन की एकरसता ही नहीं तोड़ते, बल्कि कुछ ऐसे संदेश भी देते हैं, जो हमें सोचने के लिए बाध्य कर देते हैं । कार्टूनों में किया गया कटाक्ष और दिया गया संदेश अक्सर हम पर गहरा असर छोड़ जाता है ।<br></mark><br></div><div><mark>सूझबूझ से बनाया एक छोटा-सा पॉकेट कार्टून पूरे पृष्ठ के लेख से कहीं अधिक प्रभावकारी होता है । हास्य-व्यंग्य से भरपूर कार्टून अखबार में छपी विश्लेषणपूर्ण खबरों की तुलना में ज्यादा आसानी से समझ में आता है । इसीलिए वो खबरों और लेखों की अपेक्षा पाठकों का ध्यान ज्यादा आकर्षित करता है ।<br></mark><br></div><div><mark>एक सफल कार्टूनकार या व्यंग्य चित्रकार बनने के लिए पैनी दृष्टि और मनोविज्ञान की गहरी समझ होनी जरूरी है । व्यंग्य चित्रकार किसी भी मनोवैज्ञानिक से बड़ा मनोवैज्ञानिक होता है । सूक्ष्म से सूक्ष्म तथ्य भी उससे छिपा नहीं रह सकता । वह हर घटना को आम आदमी के नजरिए से देखता है, इसीलिए उसे आम आदमी का सच्चा हमदर्द और प्रतिनिधि भी कहा जाता है ।<br></mark><br></div><div><mark>आम आदमी किसी नेता-विशेष, मुद्दे या हालात को जिस नजरिए से देखता और महसूस करता है वह नजरिया या मानदंड ही व्यंग्य चित्रकार के प्रेरक सिद्धांत बनते हैं । मनुष्य की कमजोरियां, सीमाएं, विसंगतियां तथा आशंकाएं-कार्टूनिस्ट की कलम के माध्यम से सजीव चित्रित हो जाते हैं ।<br></mark><br></div><div><mark>व्यंग्य चित्रकार किसी को नहीं बख्शता । जिस प्रकार कानून की निगाह में सब बराबर होते हैं, उसी तरह कार्टूनिस्ट के आगे भी सभी नतमस्तक रहते हैं । वो सर्वोपरि होता है । कार्टून की रेखाओं में छिपे व्यंग्य या कटाक्ष के दंश से ही राजा और रंक अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्षरत होते हैं । ‘लोग क्या सोचेंगे’ या ‘दुनिया क्या कहेगी’ या ‘खौफ’ कार्टूनों के माध्यम से ही उन तक पहुंचता है ।<br></mark><br></div><div><mark>इसमें दो राय नहीं हैं कि कार्टून हर किसी को सुकून देते हैं और एक विवेचक का काम करते हैं । यही कारण है कि, समाज और हालात से क्षुब्ध आदमी भी उन्हें देख कर राहत महसूस करता है । उसे लगता है कि देर-सवेर हर अन्यायी की खबर ली जाएगी, उसके कारनामों का भांडा फूटेगा अर्थात् कार्टून समाज में एक प्रकार की पारदर्शिता भी लाते हैं ।<br></mark><br></div><div><mark>कार्टूनों के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि आम आदमी उनमें समाज और व्यवस्था के प्रति अपने आक्रोश की अभिव्यक्ति का संतोष प्राप्त करता है । उसके मन में समाज की विडंबनाओं, प्रवंचनाओं और विरोधाभासों पर प्रहार करने की अतृप्त चाह है, उसे वो कार्टून में साकार हुआ पाता है ।<br></mark><br></div><div><mark>सूचना-प्रौद्योगिकी की क्रांति के इस दिखावटी व्यवसाय के दौर में अगर कोई भिखारी कार्टून में यह कल्पना करते हुए दिखता है कि, ‘काश मेरे पास भी कंप्यूटर होता, तो में इंटरनेट के जरिए ही भीख मांगता, तो क्या गलत है !’<br></mark><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 09:19:21 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>Divy Chaudhary.         मेरे परीवार के बारे मे              </div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 10:13:35 UTC</pubDate>
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         <title>VIRAJ UPPAL </title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><strong><mark>पहेली</mark></strong></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 11:55:49 UTC</pubDate>
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         <title>VIRAJ UPPAL</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><br><strong><mark>चुटकुले<br></mark></strong><br>एक बच्चे ने दूसरे बच्चे से पूछा – क्या तुम चीनी भाषा पढ सकते हो ?<br><br></div><div>दूसरे बच्चे ने कहा – हां , <strong>अगर वह हिंदी तथा अंग्रेजी में लिखी हो तो….<br></strong><br></div>]]></description>
         <pubDate>2020-08-14 11:59:33 UTC</pubDate>
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      </item>
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         <title>VIRAJ UPPAL</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><br><strong><mark>अंतर ढुंडिए</mark></strong><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 12:08:36 UTC</pubDate>
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         <title>Divy Chaudhary.      </title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>असली पोकेमोन ढूंढिए</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 14:55:08 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>यह सारी बाते आप सबके  बच्चो के  Liye अच्छा है</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 15:07:49 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>यह भी ।  इसका मतलब बच्चों को अच्छा खाना खाना चाहिए</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 15:10:57 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 15:17:20 UTC</pubDate>
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         <title>📹 हम को भी अच्छा खाना खाना चाहिए  क्योंकि यह हमारी परंपरा है</title>
         <author></author>
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         <pubDate>2020-08-14 15:29:07 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div> यह  शुरुआत  कि  4 डीजे दिव्या चौधरी  की tarraff se</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-14 15:39:35 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>VIRAJ UPPAL</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><strong><mark>कविता - 'मेरे प्यारे दोस्त'</mark></strong><strong><br><br>दोस्ती तेरी हमको प्यारी है<br>सारी दुनिया से ये निराली है<br>तू मेरा दोस्त कितना प्यारा है<br>तेरे बिन नही गुज़ारा है <br>तू मेरा दोस्त कितना प्यारा है<br><br>धनयवाद </strong></div>]]></description>
         <enclosure url="" />
         <pubDate>2020-08-15 05:58:09 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>VIAAN JETHANI</title>
         <author>viaanjethani</author>
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         <description><![CDATA[<pre><strong><em>अनोखी दोस्ती</em></strong></pre><div><br></div><div><strong>1. </strong><strong><mark> लेखक की कलम से</mark></strong></div><div><em>ज़िन्दगी गुज़र जाए पर दोस्ती कम ना हों।</em></div><div><em>याद हमें रखना चाहें पास हम ना हों।</em></div><div><em>कयामत तक चकता रहे ये प्यारा सा सफर।</em></div><div><em>दुआ करे कि कभी ये रिश्ता खतम ना हो।<br><br></em><strong><em>2. </em></strong><strong><mark>कहानी</mark></strong></div><div>यह बहुत समय पहले की बात है. झील किनारे एक जंगल में हिरण, कछुआ और कठफोड़वा मित्र भाव से रहते थे। एक दिन एक शिकारी ने उनके पैरों के निशान देखकर उनके रास्ते में पड़ने वाले पेड़ पर एक फंदा लटका दिया और अपनी झोपड़ी में चला गया। थोड़ी ही देर में हिरण मस्ती में झूमता हुआ उधर से निकला और फंदे में फंस गया।</div><div>वह जोर से चिल्लाया - बचाओ। उसकी पुकार सुनकर कठफोड़वा के साथ कछुआ वहाँ आ गया। कठफोड़वा कछुए से बोला- मित्र तुम्हारे दाँत मजबूत हैं। तुम इस फंदे को काटो। मैं शिकारी का रास्ता रोकता हूं।</div><div>जैसे ही कछुआ फंदा काटने लगा। उधर कठफोड़वा शिकारी की झोपड़ी की तरफ उड़ चला। उसने योजना बनाई कि जैसे ही शिकारी झोपड़ी से बाहर निकलेगा, वह उसे चोंच मारकर लहूलुहान कर देगा। उधर शिकारी ने  जैसे ही हिरण की चीख सुनी तो समझ गया कि वह फंदे में फँस चुका है। वह तुरंत झोपड़ी से बाहर निकला और पेड़ की ओर लपका। लेकिन कठफोड़वे ने उसके सिर पर चोंच मारनी शुरू कर दी। शिकारी अपनी जान बचाकर फिर झोपड़ी में भागा और पीछे वाले दरवाज़े से निकलकर पेड़ की ओर बढ़ा।लेकिन कठफोड़वा शिकारी से पहले ही पेड़ के पास पहुँच गया था। उसने देखा की कछुआ अपना काम कर चुका है, उसने हिरण और कछुए से कहा - मित्रों जल्दी से भागो। शिकारी आने ही वाला होगा। </div><div>यह सुनकर हिरण वहां से भाग निकला। लेकिन कछुआ शिकारी के हाथ लग गया। शिकारी ने कछुए को थैले में डाल लिया और बोला इसकी वजह से हिरण मेरे हाथ से निकल गया। आज इसको ही मारकर खाऊंगा।</div><div>हिरण ने सोचा उसका मित्र पकड़ा गया है। उसने मेरी जान बचाई थी, अब मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं उसकी मदद करूं। यह सोचकर वह शिकारी के रास्ते में आ गया।शिकारी ने हिरण को देखा तो थैले को वहीं फेंककर हिरण के पीछे भागा। हिरण अपनी पुरानी खोह की ओर भाग छूटा। शिकारी उसके पीछे-पीछे था। भागते-भागते हिरण अपनी खोह में घुस गया। उसने सोचा एक बार शिकारी इस खोह में घुस गया तो उसका बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। </div><div>थोड़ी ही देर में शिकारी खोह में पहुंचा। उसने सोचा अब हिरण भागकर कहां जाएगा। वह भी खोह के अंदर घुस गया। खोह के अंदर भूल-भुलैया जैसे रास्ते थे। शिकारी उन रास्तों में भटक गया। </div><div>हिरण दूसरे रास्ते से निकलकर थैले के पास जा पहुंचा और कछुए को आजाद कर दिया। उसके बाद वे तीनों मित्र वहाँ से सही-सलामत निकल गए।</div><div><strong><br>सीखः सच्चे मित्र हों, तो जीवन में मुसीबतों का आसानी से सामना किया जा सकता है.<br><br>4.</strong><strong><mark>पहेली</mark></strong></div><blockquote><pre>"<strong>कौन है' जिसे पाना बड़ा मुश्किल है पर खोना बड़ा आसान "
कौन है जिसे पाना बड़ा मुश्किल है पर खोना बड़ा आसान</strong></pre></blockquote><div><strong><mark>उत्तर</mark></strong><strong>- दोस्त<br><br>5. </strong><strong><mark>चुटकुले </mark></strong></div><pre><strong><mark>JOKE 1</mark></strong></pre><div> सोनू अपने दोस्त रवि को ज्ञान बांट रहा था…<br> अगर परीक्षा में पेपर कठिन हो तो….<br> आंखें बंद करो,<br> गहरी सांस लो,<br> और जोर से कहो-<br> यह सब्जेक्ट बहुत मजेदार है। अगले साल फिर पढ़ेंगे। </div><pre>JOKE 2</pre><div> "टीचर: नालायक पढ़ ले कभी तुने अपनी कोई बुक खोल के देखी है?<br> संजू : हाँ मैं रोज़ खोलता हूँ एक बुक!<br> टीचर : कौन सी?<br> संजू : फेसबुक" <br><br><strong>6.</strong><strong><mark>अंतर ढूँढो<br><br></mark></strong><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-15 10:25:14 UTC</pubDate>
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         <title>AAYUSH SHANKER</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>1.लेखक की कलम से.....<br>इस पत्रिका में आपको हमारे पर्यावरण के बारे कुछ जानकारी मिलेगी।<br>फिर हम अपनी कहानी की ओर चलेेेेंंगे,<br>जो बहुत ही रोमांचक है। उसके बाद हम हमारी कविता की ओर चलेेेेंगे जो  बहुत ही रोचक होगी। कविता के बाद हम पहेली की ओर चलेेेेंगे जिसे बूझना थोड़ा कठिन होगा। फिर हम अपने चुटकुले से आपको थोड़ा गुदगुदाएंगे। फिर अपनी पत्रिका के अंतिम चरण में चित्र में परिवर्तन ढूंढना होगा जो बहुत ही रोमांचक है।<br><br><br>हमारा पर्यावरण<br>*************<strong><br>पर्यावरण</strong> -पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि और आवरण से मिलकर बना है, जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास अर्थात जो हमारे चारों ओर है, और 'आवरण' जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक एवं जैविक कारकों की कुल इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा पारितंत्रीय आबादी को प्रभावित करते हैं तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं।</div><div> </div><div>संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनैतिक और सामाजिक जागृति लाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।</div><div><br> <br>2.कहानी<br>*********</div><h1>दो घड़े </h1><div>एक घड़ा मिट्टी का बना था, दूसरा पीतल का। दोनों घड़े एक नदी के किनारे पर रखे हुए थे। इसी समय अचानक नदी में बाढ़ आ गई और बहाव में दोनों घड़े नदी में बहते चले गए। काफी समय तक मिट्टी के घड़े ने अपने आप को पीतलवाले घड़े से काफी फासले पर रखना चाहा।<br>यह सब देख कर पीतलवाले घड़े ने कहा, ”तुम डरो नहीं दोस्त, मैं तुम्हें धक्का न लगाऊँगा।”<br>मिट्टीवाले घड़े ने जवाब दिया, ”तुम जान-बूझकर मुझे धक्का न लगाओगे, सही है; मगर बहाव की वजह से हम दोनों जरूर टकराएंगे। अगर ऐसा हुआ तो तुम्हारे बचाने पर भी मैं तुम्हारे धक्कों से न बच सकूँगा और मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। इसलिए अच्छा है कि हम दोनों अलग-अलग और दूर-दूर रहें।”<br><br></div><div>**********************************************<br>सीख – अपने से ज्यादा बलवान से घनिष्ठता अच्छी नहीं होती।<br><br>3.कविता<br>********</div><div>मोल</div><div>झिलमिल तारों की पलकों में<br>स्वप्निल मुस्कानों को ढाल,<br>मधुर वेदनाओं से भर के<br>मेघों के छायामय थाल;<br><br>रंग ड़ाले अपनी लाली में<br>गूँथ नये ओसों के हार,<br>विजन विपिन में आज बावली<br>बिखराती हो क्यों श्रृंगार?<br><br>फूलों के उच्छवास बिछाकर<br>फैला फैला स्वर्ण पराग,<br>विस्मॄति सी तुम मादकता सी<br>गाती हो मदिरा सा राग;<br><br>जीवन का मधु बेच रही हो<br>मतवाली आँखों में घोल<br>क्या लोगी? क्या कहा सजनि<br>'इसका दुखिया आँसू है मोल’!<br><br>4.पहेली<br>*********<br>एक फूल है काले रंग का, सिर पर सदा सुहाए । <br>तेज धूप में वो खिल जाता, छाया में मुरझाए ॥<br><br>5.चुटकुले<br>**********<br>अंग्रेजी बोलने का भूत जब दिमाग पर<br>चढ़ता है तो कुछ इस प्रकार का माहौल बन जाता है..<br><br></div><div>टीचर – कल तुम कोचिंग नहीं आये कहाँ थे.?<br><br></div><div>स्टुडेंट – वो कल हमारे यहां मंदिर में<br>ब्युटीफुल ट्रेजडी था ना, इसलिए नहीं आ पाया।<br><br></div><div>टीचर – ब्युटीफुल ट्रेजडी से मतलब ?<br><br></div><div>स्टुडेंट – मतलब सुन्दर काण्ड था।<br><br></div><div>टीचर अभी भी सदमें मे है...।<br><br>6.अंतर ढूूंढो...<br>**************</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-15 10:34:31 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author>viaanjethani</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/681335134</link>
         <description><![CDATA[
ज़िन्दगी गुज़र जाए पर दोस्ती कम ना हों।
याद हमें रखना चाहें पास हम ना हों।
कयामत तक चकता रहे ये प्यारा सा सफर।
दुआ करे कि कभी ये रिश्ता खतम ना हो।]]></description>
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         <pubDate>2020-08-15 10:47:28 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author>viaanjethani</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/681359083</link>
         <description><![CDATA[6.अंतर ढूँढो]]></description>
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         <pubDate>2020-08-15 12:47:03 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>Apeksha Aggarwal </div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-16 04:04:20 UTC</pubDate>
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      <item>
         <title>पार्थ मुद्गल</title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><br></div><pre><strong><em>कार्टून की दुनिया</em></strong></pre><div><br> १)कविता <br>मेरा कमरा है गुलज़ार<strong>,<br></strong>पूछो पूछो कैसे यार इसमें रहते,व्यंग्यकारमेरा मोगली, <br>मोटू पतलू शिनचैन और चाचा चौधरी<br>कहीं पे लड़ते टॉम &amp;  जैरी<br>कहीं है मिकी माउस का प्यार<br>ये मेरे सुख दुख के साथी<br>करते हैं सब मुझसे प्यार!<br><br>२) लेखक की कलम से...<br>कार्टून तो हिंदी में व्यंग्य चित्र कहा जाता है। कार्टून का नाम सुनते ही सबके चेहरे खिल उठते हैं।हंसना सब को अच्छा लगता है। मैंने अपनी ई- पत्रिका के लिए कार्टून की दुनिया विषय इसलिए चुना कि मैं सबको खुश देखना चाहता हूं।आशा करता हूं मेरी पत्रिका आप सबको अच्छी लगेगी।कार्टून की दुनिया बहुत विचित्र है। आइए जानें इस विचित्र दुनिया के बारे में।<br><br>३) कार्टून की दुनिया का इतिहास..<br>इस मनोरंजक संसार का आरंभ सन 1908 में फ्रांस के एक चित्रकार एमिली कॉल के बनाए कार्टून फैंटॉम्स एग्री से हुआ। यह एक हाथ से बना कार्टून था।1914 में विंसन मैके ने डायनासोर पर एक कार्टून फिल्म बनाई जो बहुत सफल रही। 1920 से लेकर 1960 तक बहुत  सी कार्टून फिल्में बनी और थियेटर में दिथाई जाने लगी। 1926 से पहले यह कार्टून बिना आवाज़ और संगीत के थे। 1928 में मिकी माउस आवाज़ और संगीत के साथ पहली रंगीन कार्टून फिल्म आयी। 1932 में कार्टून कि दुनिया में वृक्षों और फूलों का आरंभ हुआ जो बच्चो को बहुत ही अच्छा लगा। 1937 में डिज़्नी पहली रंगीन एनिमेटेड कार्टून फिल्म लाया जिसका नाम था स्नो व्हाइट एंड सेवेन दार्फ। यह अब तक का सबसे लोक प्रिय कार्टून था। 1940 में विलियम हेना और जोसेफ रियवर्ला ने टॉम एंड जैरी 160 श्रृंखलाएं बनाईं।हर श्रृंखला 6 से 10 मिनट की थी। इसे सबसे अधिक 7 अकेडमिक अवॉर्ड भी मिले।तब से आज तक कार्टून कि दुनिया बहुत विस्तृत हो चुकी है। कार्टून मनोरंजन का सबसे सशक्त माध्यम है। अब तो कार्टून के अलग से पूरे चेनल हैं जिनमें दिन भर सक्की पसंद के कार्टून चलते रहते हैं। यह तो थी व्यंग्य चित्रों की चित्रपट की दुनिया।<br><br>४)अब बात करते हैं कार्टून के दूसरे पक्ष की...<br> कार्टून हर समाचार और पत्रिका का मुख्य हिस्सा हैं।सभी समाचार पत्रों में मुख्य पृष्ठ पर एक कार्टून ज़रूर होता है जो बहुत ही कम शब्दों में बहुत ही बड़ी बात कह देता है। संसार की हर एक स्थिति पर व्यंग्य चित्रकार बहुत ही प्रभावी ढंग से व्यंग्य चित्र प्रस्तुत करते हैं। भारत में कार्टून कला का पितामह केशव शंकर को माना जाता है। प्राण, सुधीर धर और खुशवंत सिंह भारत के प्रसिद्ध व्यंग्य चित्रकार हैं। कार्टून की दुनिया आज के समय में बच्चों और बड़ों की खुशियों का खज़ाना हैं।<br>धन्यवाद </div><pre>पार्थ मुद्गल </pre><var>
<br></var>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-16 12:55:48 UTC</pubDate>
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      <item>
         <title></title>
         <author></author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/682200176</link>
         <description><![CDATA[<div>रीत तनेजा<br>अंंतर ढूंढे</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-17 03:43:17 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>कार्टून की दुनिया </title>
         <author>mokshakaul</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/687156195</link>
         <description><![CDATA[<div>लेखक की </div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-19 14:25:00 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author>nandikakaul</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/688812047</link>
         <description><![CDATA[<div>कार्टून की दुनिया</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-20 06:44:10 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>पर्यावरण</title>
         <author>sawhneyshuchi</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/692857541</link>
         <description><![CDATA[<div>प्रस्तुतकर्ता - </div><pre>शौर्य साहनी
रोल नॅमबर - 38

<strong>लेखक की कलम से<br></strong><br>मानव और पर्यावरण इन दोनों का गहरा संबंध हैं | लेकिन मानव और पर्यावरण यह दोनों एक दुसरे पर निर्धारित होते हैं | अगर पर्यवरण में थोडासा भी बदल हो जाता हैं उसका परिणाम मनुष्य पर होने लगता हैं |<br><br></pre><div>पर्यावरण एक प्राकृतिक वातावरण है, जो इस धरती पर बढ़ने, पोषण और नष्ट करने में सहायता करती हैं | पर्यावरण से मनुष्य को बहुत सारी चीजे प्राप्त होती हैं | मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण को हानी पहुँचा रहा हैं |<br><br>इस धरती पर सबसे ज्यादा मनुष्य और सभी पशु – पक्षियों को जीवित रहने के लिए पेड़ महत्पूर्ण भूमिका निभाते हैं | पेड़ों के बिना किसी भी सजीव का जीवन जीना बहुत मुश्किल हैं | पेड़ों से मनुष्य को फल, फुल, ईंधन, भोजन यह सभी चीजे प्राप्त होती हैं |<br><br>पेड़ के लकड़ी से दरवाजे, खिडकियां और अन्य प्रकार की लकड़ी खिलौने बनाने के लिए प्यायोग करता हैं | इसलिए मनुष्य अपनी सुख – सुविधाओं के लिए पेड़ों की कटाई करता हैं | जिसकी वजह पर्यावरण को हानी पहुँचती हैं | पेड़ काटने के की ग्लोबल वार्मिंग जैसे समस्या निर्माण हो जाती हैं |<br><br><br>पर्यावरण प्रदुषण यह मानव निर्मित किये गए कार्यों की वजह से होता हैं | जैसे की कारखानों में से नीलने वाला जल नदी – नालों में छोड़ दिया जाता हैं | जिसके कारण जल दूषित हो जाता हैं और कारखानों और वाहनों में से निकलने वावाले धुएं के कारण हवा प्रदूषित हो जाती हैं |<br><br></div><div>इन दोनों में से निकलने वाला धुआं वातावरण में चारों तरफ फैल जाता हैं | जिसकी वजह मनुष्य को साँस लेना भी बहुत मुश्किल हो जाता हैं |<br><br>पर्यावरण को बचाने के लिए हम सभी को पेड़ों की कटाई नहीं करनी चाहिए बल्कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए | मानव निर्मित किये जाने वाले अन्य प्रकार के प्रदुषण को रोकना चाहिए |<br><br></div><div>मनुष्य को हरे पौधों का रोपण करना चाहिए | पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सभी लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए | इसलिए हर साल हमारे देश में ५ जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता हैं |</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-22 13:53:52 UTC</pubDate>
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         <title>पर्यावरण</title>
         <author>sawhneyshuchi</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/692863470</link>
         <description><![CDATA[<div>प्रस्तुतकर्ता - </div><pre>शौर्य साहनी
रोल नॅमबर - 38</pre><div><br><strong>"आओ ये संकल्प उठाए"</strong><br><br></div><div>आओ ये संकल्प उठाए,<br>पर्यावरण को नष्ट होने से बचाएँ।<br><br>स्वयं भी जाग्रत हो,<br>और लोगो में भी चेतना जगाए।<br><br>देकर नवजीवन इस प्रकृति को,<br>इसका अस्तित्व बचाएँ।<br><br>जल ही जीवन है धरती पर,<br>इसकी हर एक बूंद बचाएँ।<br><br>संरक्षित कर इसको,<br>अपना भविष्य बचाएँ।<br><br>वृक्ष नही कटने पाएँ,<br>हरियाली न मिटने पाए,<br><br>लेकर एक नया संकल्प,<br>हर एक दिन नया वृक्ष लगाएँ।<br><br>ये प्रकृति ही जीवन है,<br>अपने जीवन को बचाएँ।</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-22 14:07:02 UTC</pubDate>
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         <title>कार्टून की दुनिया           पल्लवी   रोल नंबर 30</title>
         <author>pallavi10</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/693354057</link>
         <description><![CDATA[<pre><strong>लेखक की कलम से</strong></pre><div><br>कार्टून की दुनिया की कहनी हर दिल पर करती राज<br><br><strong>कार्टून</strong> का अर्थ है कोई भी हास्य या मनोरंजक चित्र। कार्टून फ़िल्म एक चलचित्र (सिनेमा, या उसका हिस्सा) होता है, जो एक कार्टून-चित्रों के सिलसिले को लगातार फ़ोटोग्राफ़ी करके बनाया जाता है। हर चित्र अपने पिछले वाले से थोड़ा अलग हरकत या चाल चित्रित करता है, जिससे कि हमारी आँखों को ये चित्र चलते-फ़िरते नज़र आते हैं, जब उनको इसी सिलसिले में प्रोजेक्ट किया जाता है। कार्टून फ़िल्में मनोरंजन का अच्छा साधन हैं, ख़ास तौर पर बच्चों के लिये। कुछ टीवी चैनल सिर्फ़ कार्टूनों के लिये ही बने हैं, जैसे <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%A8_%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95">कार्टून नेटवर्क</a>।<br><br><strong><mark>पहेली 1<br></mark></strong><br>ना करता लड़ाई ,<br>फिर भी रोज होती मेरी पिटाई ,<br>कोई मेरा नाम तो बताओ भाई ?<br><strong><mark>उत्तर</mark></strong><strong>- ढोल<br><br></strong>चुटकुले<br><br>मास्टर जी - भारत की सबसे खतरनाक<br>नदी कौन सी है? <br><br>राजू - भावना...!<br><br>मास्टर (चौंक कर) - वो कैसे...? <br><br>राजू - क्योंकि, सब इसमें बह जाते हैं...!!!</div><div><br>अंतर ढूँढो<br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-23 14:10:51 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author>pallavi10</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/693378894</link>
         <description><![CDATA[लेखक की कलम से]]></description>
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         <pubDate>2020-08-23 15:08:43 UTC</pubDate>
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      <item>
         <title>लेखक की कलम से</title>
         <author>aaravgarg</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/703608559</link>
         <description><![CDATA[<div>पर्यावरण<br>प्रस्तुतकर्ता<br>आरव गर्ग<br>रोल नंबर -2<br>पर्यावरण (अंग्रेज़ी: Environment) शब्द का निर्माण दो शब्दों से मिल कर हुआ है। "परि" जो हमारे चारों ओर है"आवरण" जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक एवं जैविक कारकों की समष्टिगत इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा पारितंत्रीय आबादी को प्रभावित करते हैं तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं।<br><br><br>कविता<br>पेड़<br><br>फूलों को मत तोड़ो<br><br>छिन जायेगी मेरी ममता<br><br>हरियाली को मत हरो<br><br>हो जायेंगे मेरे चेहरे स्याह<br><br>मेरी बाहों को मत काटो<br><br>बन जाऊँगा मैं अपंग<br><br>कहने दो बाबा को<br><br>नीम तले कथा-कहानी<br><br>झूलने दो अमराई में<br><br>बच्चों को झूला<br><br>मत छांटो मेरे सपने<br><br>मेरी खुशियाँ लुट जायेंगी।<br><br><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-27 19:20:38 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>अभिनव शर्मा</title>
         <author>varunsharma99824</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/706600818</link>
         <description><![CDATA[<div><strong><em>लेखक की कलम से</em></strong></div><div><strong><br></strong>पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि और आवरण से मिलकर बना है, जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास अर्थात <br><br>जो हमारे चारों ओर है, और "आवरण" जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक एवं जैविक कारकों की कुल इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा पारितंत्रीय आबादी को प्रभावित करते हैं तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं।<br><br>पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े-मकोड़े, सभी जीव-जंतु और पेड़-पौधों के अलावा उनसे जुड़ी सारी जैव क्रियाएं और प्रक्रियाएं भी शामिल हैं<br><strong><br></strong><strong><em>कविता</em></strong><strong> <br><br></strong>कितनी मनोरम है ये धरती,<br>प्रकृति और ये पर्यावरण।<br>कल-कल बहते पानी के झरने,<br>हरी भरी सी धरती और इसके इंद्रधनुषीय नज़ारे।<br><br>कलरव करते नभ में पक्षी,<br>जीवन के राग सुनाते है।<br>मस्त पवन के झोंको में,<br>यूँही बहतें जाते हैं।<br><br>फूलों से रस को चुनने,<br>कितनें भौरें आते है।<br>कली-कली पर घूम -घूम कर,<br>देखो कैसे इतरातें है।<br><br>बारिश की बूंदे भी देखो,<br>सबके मन को भाती है।<br>हरा-भरा कर धरती को,<br>सबको जीवन दे जाती हैं।<br><br>कितनी मनोरम है ये धरती,<br>प्रकृति और ये पर्यावरण।<br>हमको जीवन देनी वाली प्रकृति का,<br>मिलकर करना है हम सबको सरंक्षण।</div><div><br><strong><em>कहानी - रानी और बौना<br></em></strong><strong><br></strong>एक बार, एक किसान था जो कहता था-"मेरी बेटी भूसे से सोना बना सकती है।" <br>राजा ने यह सुना तो उसने लड़की को भूसे से सोना बनाने को कहा। लड़की को सोना बनाना नहीं आता था। वह रोने लगी। उसका रोना सुनकर एक बौना लड़की की मदद करने वहाँ आया। <br><br>उसने सोना तो बना दिया परंतु बदले में उसका हार ले लिया।<br>राजा ने लड़की को और भूसा दे दिया। इस बार बौने ने सोने के बदले उससे उसका पहला बच्चा मांगा। <br><br>लड़की के द्वारा भूसे से सोना बनाने से राजा बहुत प्रभावित हुआ और उसने लड़की से विवाह कर लिया।<br> एक साल बाद उनका बेटा पैदा हुआ। बौना बच्चे को लेने आया तो रानी ने बच्चे को देने से मना कर दिया। <br><br>तब बौने ने कहा-"अगर तुम मेरा नाम बता दो तो मैं तुम्हारे बच्चे को छोड़ दूंगा।"<br>रानी ने उसके घर तक उसका पीछा किया। बौना घर जाकर गाना गाने लगा। गाने में उसने अपना नाम बता दिया। <br><br>इसलिए जब बौने ने अपना नाम पूछा तो रानी ने झट से उसका नाम बता दिया।<br> बौना वहाँ से चला गया। बौना फिर दुबारा कभी लड़की से नहीं मिला।<br><br><br><strong><em>पहेलियाँ<br></em></strong><strong><br></strong>1.  ऐसा कौन सा फूल है जिसमें ना ही रंग है ना ही खुशबू?<br>आन्सर:- अप्रैल फूल<br><br>2. वह कौन जो बिना बुलाए रात को आते हैं और सुबह बिना चुराए गायब हो जाते हैं?<br>आन्सर:- सितारे<br><br>3. वह क्या है जो लगाते समय हरी होती है और निकलते समय लाल हो जाती है?<br>आन्सर:- मेहंदी<br><br>4. जिसे आप देख सकते हैं उसके साथ खेल सकते हैं वह आपके अंदर भी है उसके बिना आप जी भी नहीं सकते और वह आपको मार दी सकता है बताइए वह क्या है?<br>आन्सर:- पानी<br><br><strong><em>चुटकुले</em></strong><strong><br><br></strong>1. एक बच्चे ने दूसरे बच्चे से पूछा - क्या तुम चीनी भाषा पढ सकते हो ?<br> दूसरे बच्चे ने कहा - हां , अगर वह हिंदी तथा अंग्रेजी में लिखी हो तो....<br><br>2. पिता ( बेटे से ) - देखों बेटे , जुआ नहीं खेलते | यह ऐसी आदत हैं कि यदि इसमें आज जीतोगे तो कल हारोगे , परसों जीतोगे तो उससे अगले दिन हार जाओगे |<br>बेटा - बस , पिताजी ! मैं समझ गया , आगे से मैं एक दिन छौड़कर खेला करूंगा |<br><br><strong><em>अंतर ढूंढो</em></strong><strong><br></strong><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-08-29 13:52:05 UTC</pubDate>
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      </item>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div>, का</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-09-05 16:55:48 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div> https://padlet.com/angelnehasharma11/mh66gi7zgyyb9afw</div>]]></description>
         <pubDate>2020-09-05 17:45:52 UTC</pubDate>
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         <title></title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2020-09-05 17:56:39 UTC</pubDate>
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         <title>कार्टून की दुनिया 😊</title>
         <author>nandikakaul</author>
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         <description><![CDATA[<div>Nandika Kaul</div>]]></description>
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         <pubDate>2020-09-09 06:53:12 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author>mokshakaul</author>
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         <description><![CDATA[<pre><strong><em>कार्टून की दुनिया
NANDIKA KAUL
</em></strong><strong><em><mark>लेखक की कलम से</mark></em></strong><mark>
</mark><br><pre><strong><em>बच्चों को कार्टून देखना पसंद है|
कार्टून... यह नाम आप सभी के लिए बहुत ही परिचित होना चाहिए .... क्या आप जानते हैं क्यों ?? आपको बता दें कि ज्यादातर बच्चे कार्टून के प्रति रूचि रखते हैं और आकर्षित होते हैं। 
हालाँकि बच्चे रंगीन और अद्भुत चरित्रों पर मोहित हो जाते हैं लेकिन फिर भी उन्हें बहुत अधिक टीवी और मोबाइल फोन नहीं देखना चाहिए क्योंकि वे उनकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं...</em></strong></pre><strong><em><mark>कहानी</mark></em></strong><mark>
</mark>एक दिन रोहित नाम का एक लड़का अपनी दादी के घर जा रहा था जिस रास्ते पर उसने एक कार्टून देखा था वह शक्तिमन था ... यह सिर्फ एक गुब्बारा था
अगले दिन केवल वह छत पर चढ़ गया और उसमें से कूद गया, उसने सोचा कि शक्तिमन उसे बचा लेगा ... और यह कार्टून का संपादन था और इसलिए मैं यह कहना चाहूंगा कि हमें कार्टून देखना चाहिए ... लेकिन सीमा में।
<em><mark>कविता

</mark></em><br></pre><div><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-09-09 07:03:02 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title></title>
         <author>nandikakaul</author>
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         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2020-09-11 12:01:09 UTC</pubDate>
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      </item>
      <item>
         <title>पहेलियाँ</title>
         <author>dhingrapriyanka218</author>
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         <description><![CDATA[<div><strong>उत्तर दीपावली है</strong></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-09-18 06:09:06 UTC</pubDate>
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      <item>
         <title>कविता</title>
         <author>dhingrapriyanka218</author>
         <link>https://padlet.com/chakuarchana/4gfuaeii1mmzy1la/wish/757953753</link>
         <description><![CDATA[]]></description>
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         <pubDate>2020-09-18 06:10:04 UTC</pubDate>
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         <title>लेखक की कलम से </title>
         <author></author>
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         <description><![CDATA[<div><strong><mark>मेरा परिवार<br>प्रस्तुतकर्ता<br>द्रष्टि भसीन<br>रोल नंबर -18</mark></strong></div><div>हम सभी लोगो में से ज्यादातर लोगो का अपना एक परिवार होता है! हर एक के लिए अपना परिवार बहुत ही ख़ास होता है! हर एक के परिवार में माँ, बाप, दादा दादी, भाई , बहन जैसे और भी बहुत से लोग होते है! सभी लोगो की तरह मेरा भी एक बहुत ही बढ़िया परिवार है! परिवार भी कई तरह के होते है कुछ लोगो का परिवार छोटा होता है वही कुछ लोगो का परिवार दुसरे लोगो के मुकाबले बहुत बड़ा होता है! मेरा परिवार ना ही बहुत छोटा है और ना ही बहुत बड़ा है! <br><br>मेरे परिवार में कुल मिलाकर 9 लोग रहते है! मेरे परिवार में  दादा-दादी, माँ-पिताजी, चाचा-चाची और हम तीन भाई-बहन हैं! हम अपने परिवार के बड़े लोगो का बहुत ही अच्छे तरीके से आदर करते है! मेरे परिवार के बड़े लोग भी हम सभी से बहुत प्यार करते है! मेरे परिवार में कभी भी किसी भी बात को लेकर कोई झगड़ा नहीं होता है! मेरे परिवार के  बुजुर्ग लोगो का हम सभी लोग बहुत ही सम्मान करते है! हर परिवार के  बुजुर्ग लोग हमेशा अपने परिवार का भला चाहते है! मेरे परिवार के भी दादा-दादी हमेशा हम सभी का भला चाहते है! मेरे परिवार का कोई भी व्यक्ति दादा-दादी के बात का कभी भी बुरा नहीं मानता है! दादा-दादी के हर एक बात का पालन करना मेरे परिवार के सभी लोग अपना कर्त्तव्य समझते हैं!  मेरे दादा-दादी हमेशा हम लोगो को अच्छी अच्छी बाते बताते है! हम सभी लोग दादा-दादी की कही हुई बातो को बहुत ही ध्यानपूर्वक सुनते है! <br><br></div><div><strong><mark>कविता </mark></strong></div><div><strong><mark>मेरा छोटा सा परिवार</mark></strong></div><div>मेरा छोटा सा परिवार ,</div><div>इससे हम करते हैं प्यार।</div><div>मम्मी-पापा सोनू -भैया,</div><div>करते मुझसे प्यार दुलार|<br><br>मम्मी-पापा से कहता है,</div><div>मेरा प्यारा भैया सोनू।</div><div>हरपल मोनू मुझे सताती,</div><div>करो फैसला तो मैं जानूं ।</div><div><br></div><div>नहीं तो भाई कह देता हूं,</div><div>खट्टी कह दूंगा इस बार।</div><div>मेरा छोटा सा परिवार,</div><div>इससे हम करते हैं प्यार ।<br><br><a href="https://hindi.webdunia.com/kids-jokes"><strong><mark>हँसगुल्ले</mark></strong></a><strong><mark> चुटकुले</mark></strong></div><div><strong><br>तुम चीनी भाषा पढ सकते..<br></strong>एक बच्चे ने दूसरे बच्चे से पूछा - क्या तुम चीनी भाषा पढ सकते हो ?<br>दूसरे बच्चे ने कहा - हां , अगर वह हिंदी तथा अंग्रेजी में लिखी हो तो..<br><br><strong><br>पिता ( बेटे से ) - देखों बेटे , जुआ नहीं खेलते.<br></strong>पिता ( बेटे से ) - देखों बेटे , जुआ नहीं खेलते | यह ऐसी आदत हैं कि यदि इसमें आज जीतोगे तो कल हारोगे , परसों जीतोगे तो उससे अगले दिन हार जाओगे |<br>बेटा - बस , पिताजी ! मैं समझ गया , आगे से मैं एक दिन छौड़कर खेला करूंगा |<br><br></div><div><a href="https://www.hindime.info/joke/hindi-jokes/mamma-kya-main-bhagavan-ki-tarah-i940.html"><strong>मम्मी क्या मैं भगवान की तरह..</strong></a></div><div>बच्चा - मम्मी क्या मैं भगवान की तरह दिखता हूं ?<br>मम्मी - नहीं , पर तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो बेटा |<br>बच्चा - क्योंकि मम्मी मैं कहीं भी जाता हूं तो सब यही कहते हैं कि हे भगवान फिर आ गया |</div><div><br><br></div><h1><strong><mark>हिंदी पहेलियों का दुर्लभ संग्रह! </mark></strong></h1><div>गोल है पर गेंद नहीं, पूँछ है पर पशु नहीं । पूंछ पकड़कर खेलें बच्चे, फिर भी मेरे आंसू न निकलते ॥<br><strong><mark>गुब्बारा</mark></strong><br><br>ऊँट की बैठक, हिरन सी तेज चाल । वो कौन सा जानवर जिसके पूँछ न बाल॥<br><strong><mark>मेंढक</mark></strong><br><br>जो करता है वायु शुद्ध, फल देकर जो पेट भरे । मानव बना है उसका दुश्मन, फिर भी वह उपकार करे ॥  <br><strong><mark>पेड़</mark></strong><br><br>फूल भी हूँ, फल भी हूँ और हूँ मिठाई । तो बताओ क्या हूँ मैं भाई ॥<br><strong><mark>गुलाबजामुन</mark></strong><br><br></div>]]></description>
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         <pubDate>2020-10-03 15:05:32 UTC</pubDate>
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